
NewDelhi : कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए सिर दर्द बना हुआ है. बता दें कि तीन दिसंबर यानी आज गुरुवार को किसान संगठनों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच अहम बैठक होने जा रहा है. जानकारों के अनुसार अगर इस बैठक में दोनों पक्ष कुछ बिंदुओं और एमएसपी पर सहमत हो जाते हैं, तो किसान आंदोलन खत्म हो जायेगा. यदि सहमति नहीं बनी, तो किसान आंदोलन नया मोड़ ले सकता है.
Delhi: Farmers stay put at Nirankari Samagam Ground in Burari, the government designated place for the protest.
Delegation of farmers will meet Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar today. pic.twitter.com/xkzNdozcRC
— ANI (@ANI) December 3, 2020
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पिछली बैठक का नतीजा सिफर रहा था
जान लें कि किसान संगठनों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच मंगलवार को हुई पिछली बैठक का नतीजा सिफर रहा था. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि कानून को लेकर एक छोटी किसान समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था, इसमें किसान संगठनों के पांच प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ व कृषि मंत्रालय के अधिकारी शामिल करने की बात थी, लेकिन किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री का प्रस्ताव नहीं माना.
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किसान संगठन 5 दिसंबर से प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दे चुके है
पूर्व में किसान संगठन 5 दिसंबर से प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दे चुके है. खबर है कि 5 दिसंबर से मोदी सरकार और कृषि कार्यों में दिलचस्पी दिखाने वाले औद्योगिक घरानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो जायेंगे. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट क्षेत्र की सबसे बड़ी यूनियन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने किसानों की मांग को जायज ठहराया है, कहा है कि अगर सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं करती, तो यूनियन आठ दिसंबर से उत्तर भारत में चक्का जाम कर देगी. पूरे देश में ट्रकों की हड़ताल की जायेगी.
किसान आदोलन को लेकर गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात करेंगे. जान लें कि अमरिंदर सिंह पहले ही किसानों और केंद्र के बीच बातचीत के पक्षधर रहे हैं और दोनों के बीच मध्यस्थता की पेशकश भी कर चुके हैं. ऐसे में केंद्र सरकार किसान आंदोलन को शांत कराने में उनकी मदद ले सकती है.




