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झारखंड में वेतन और पेंशन भुगतान में कुल बजट का 22 फीसदी से अधिक हो रहा खर्च

झारखंड में 2.29 लाख सरकारी कर्मियों के वेतन में खर्च हो रहे हैं 11430 करोड़ से ज्यादा

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Deepak

Ranchi: झारखंड में राज्य सरकार कुल बजट का 22 फीसदी वेतन और पेंशन भुगतान के बकाये में खर्च कर रही है. राज्य के मध्यावधि फिस्कल रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है. योजना और वित्त विभाग की तरफ से जारी मध्यावधि वित्तीय रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 से लगातार वेतन भुगतान और पेंशन का लंबित भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है. 2.29 लाख से अधिक सरकारी कर्मियों के वेतन में अब सरकार को 11430 करोड़ का खर्च वहन करना पड़ रहा है, जबकि पेंशनधारियों को 5000 करोड़ रुपये देने पड़ रहे हैं.

वेतन और पेंशन को जोड़ दिया जाये तो यह आंकड़ा 2011-12 की तुलना में दोगुना से अधिक हो गया है. 2011-12 में वेतन और पेंशन भुगतान के बाबत सरकार को 8446.74 करोड़ खर्च करना पड़ा था. अब 2017-18 में यह बढ़कर 16736.26 करोड़ हो गया है. सरकार के ही आंकड़ों को लें तो राज्य भर में सरकारी कर्मियों का स्वीकृत पद 338,742 है. इनके विरुद्ध 229,267 कर्मी काम कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमूमन कुल बजट का 11 फीसदी हिस्सा पेंशन भुगतान में खर्च हो रहा है, जबकि 20 फीसदी से अधिक वेतन के हिस्से में जा रहा है. सरकार के कुल व्यय का यह 38 फीसदी से अधिक है.

गृह और पुलिस विभाग में हैं सबसे अधिक कर्मचारी

राज्य के गृह और पुलिस महकमे में सबसे अधिक कर्मचारी हैं. इस महकमे में 81,686 कर्मियों को सरकार की तरफ से 3129.98 करोड़ रुपये सिर्फ वेतन में दिया जा रहा है. वहीं स्कूली शिक्षा (माध्यमिक तथा उच्च) में 12,363 कर्मियों के लिए सरकार 840.89 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. माध्यमिक स्तरीय शिक्षण के लिए 59,709 कर्मचारियों को सरकार 3069.42 करोड़ रुपये दे रही है. पेयजल और स्वच्छता विभाग के 2,817 कर्मियों पर सरकार का खर्च सिर्फ वेतन में 138 करोड़, जल संसाधन विभाग में 369.86 करोड़, श्रम नियोजन और प्रशिक्षण विभाग में 96.86 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं.

वहीं राज्य सरकार के कानून और हाईकोर्ट से जुड़े कर्मियों पर सरकार 369 करोड़ खर्च कर रही है. सरकार के वन पर्यावरण विभाग का सिर्फ वेतन मद का खर्च 227.36 करोड़ रुपये है. नागर विमानन विभाग के 12 कर्मचारियों को सरकार 81.21 लाख रुपये का वेतन भुगतान कर रही है. सरकार का बजट बनानेवाले योजना और वित्त विभाग का खर्च 40 करोड़ रुपये से अधिक है. वहीं राज्य में चुनाव करानेवाले विभाग मंत्रिमंडल निर्वाचन का वेतन का खर्च 7.44 करोड़ रुपये से अधिक है.

2011-12 से बढ़ता पेंशन और वेतन मद का खर्च

वित्तीय वर्ष वेतन-पेंशन मद का खर्च
2011-12 8446.74 करोड़
2012-13 9377.21 करोड़
2013-14 10418.47 करोड़
2014-15 10846.87 करोड़
2015-16 12167.97 करोड़
2016-17 13024.25 करोड़
2017-18 16736.26 करोड़

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