
New Delhi: झारखंड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि स्पेशल इकॉनोमिक जोन को सक्षम बनाना होगा. यदि भारत को वर्ष 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था में तब्दील होना है, तो मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में कंपीटीटिव एबिलिटी के साथ-साथ सर्विस सेक्टर से जुड़े मौजूदा परिवेश में भी बुनियादी बदलाव सुनिश्चित करने होंगे.
इन बदलावों को बल देने के लिए स्पेशल इकॉनोमिक जोन को सक्षम बनाना होगा और सरल नियम बनाने होंगे. सांसद पोद्दार राज्यसभा में स्पेशल इकोनॉमिक जोन संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे.
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महेश पोद्दार ने कहा कि खुले बाज़ार की अर्थव्यवस्था के प्रचलन में आने के बाद उद्योग, व्यापार, निवेश का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है. ऐसे में परंपरागत तरीके से उद्योग, व्यापार, निवेश की गतिविधियां चलाकर देश की आर्थिक उन्नति की उम्मीद नहीं की जा सकती.
नये बदलावों के लिए रहना होगा तैयार
उन्होंने चीन का हवाला देते हुए कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध में तकनीकी तौर पर सक्षम होने के बावजूद रूस, अमेरिका को चुनौती देने लायक नहीं बन सका.
लेकिन साम्यवादी देश होने के बावजूद चीन ने यह क्षमता हासिल कर ली है. आज चीन में हर उत्पाद के लिए अलग–अलग SEZ हैं और चीन दुनिया की फैक्ट्री बन गया है. भारत को अगर चीन और अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करनी है तो हमें नए बदलावों के लिए तैयार होना होगा.
स्पेशल इकोनॉमिक जोन को बनाना होगा सक्षम
श्री पोद्दार ने कहा कि देश के प्रसिद्ध उद्योगपति भारत फोर्ज लिमिटेड के चेयरमैन बाबा कल्याणी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा तैयार भारत की वर्तमान विशेष आर्थिक क्षेत्र नीति अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत को वर्ष 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था में तब्दील होना है, तो मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में कंपीटीटिव एबिलिटी के साथ-साथ सर्विस सेक्टर से जुड़े मौजूदा परिवेश में भी बुनियादी बदलाव सुनिश्चित करने होंगे.
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साथ ही आईटी सेक्टर और इससे जुड़ी सेवाओं के क्षेत्र में मिली कामयाबी को स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सेवाओं, कानूनी, मरम्मत और डिजाइन सेवाओं जैसे अन्य सेवा क्षेत्रों/सेक्टरों में भी सुनिश्चित करना होगा.
उन्होंने कहा कि भारत पहला एशियाई देश है, जिसने निर्यात को बढ़ाने के लिये 1965 में कांडला में एक विशेष क्षेत्र की स्थापना की थी. झारखंड के गोड्डा में 425 हेक्टेयर क्षेत्र में भी सरकार ने अडाणी पावर की 14,000 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) परियोजना को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना में बनने वाली बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जाएगी.
विशेष आर्थिक जोन (संशोधन विधेयक-2019) के जरिये पहले के कानून में ‘व्यक्तियों’ की परिभाषा में ‘ट्रस्ट’ भी जोड़ने का प्रावधान किया गया है. इसकी जरुरत इसलिए है क्योंकि व्यापार की नयी विधा में वैकल्पिक निवेश फंड का चलन आया है, जो एक ट्रस्ट के रूप में काम करता है.
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