Main SliderRanchi

बजट जितने कर्ज में डूबी झारखंड की अर्थव्यवस्था, क्या 218 करोड़ का बोझ उठाने को है तैयार!

Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड में सरकार चुनावी मोड में जा चुकी है. नतीजा यह है कि यहां की पूर्ण बहुमत वाली सरकार एक-से-बढ़कर-एक लुभावने घोषणाएं कर रही है. कई वादों के साथ जनता के बीच जा रही है.

advt

इन्हीं घोषणाओं में से एक, जिसे सूबे के मुखिया रघुवर दास ने किया है, वो है उज्जवला योजना के तहत मिलने वाले गैस सिलेंडर को रीफील करना है. सरकार का कहना है कि झारखंड देश का वो पहला राज्य होगा, जहां उज्जवला योजना के लाभुकों का सिलेंडर रीफील करवाया जायेगा.

साथ ही आने वाले दिनों में सरकार की तरफ से 13 लाख और सिलेंडर बांटे जाएंगे. यह प्रक्रिया 23 अगस्त से शुरू होगी. लेकिन इस बाबत अभी तक जिला स्तर पर किसी तरह का कोई निर्देश सरकार की तरफ से नहीं गया है.

इसे भी पढ़ेंःतो क्या आर्थिक मोर्चे पर फेल हो रही मोदी सरकार

adv

जिला स्तर के अधिकारियों से पूछे जाने पर उन्होंने साफ तौर से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि जबतक सरकार की तरफ से लिखित में आदेश नहीं आ जाता है, वो इस मामले पर कुछ नहीं कहेंगे.

43 लाख सिलेंडर एकबार रीफील कराने पर आयेगा 218 करोड़ का खर्च

बीते रविवार को झारखंड सरकार की तरफ से एक बयान जारी किया गया. बयान के मुताबिक, सरकार ने अबतक राज्य भर में 31 लाख परिवारों को सिलेंडर बांटा है और 23 अगस्त से 12 लाख अतिरिक्त परिवार में गैस सिलेंडर बंटना है.

झारखंड में उज्जवला योजना के तहत एक गैस स्टोव और एक भरा सिलेंडर दिया जाता है. सरकार की मानें तो अब गैस खत्म होने पर सरकार एकबार फिर से लाभुकों का सिलेंडर रीफील करायेगी.

झारखंड में गैस सब्सिडी के बाद भरे हुए एक गैस सिलेंडर की कीमत करीब 629 है. 122 रुपए सब्सिडी मिलने के बाद एक ग्राहक को इसकी कीमत करीब 507 रुपये पड़ती है. ऐसे में सरकार अगर अपने सभी लाभुकों के गैस सिलेंडर दोबारा से भरवाती है, तो सरकार पर कुल बोझ करीब 2,180,100,000‬ का आयेगा.

कर्ज में डूबी हुई है झारखंड की अर्थव्यवस्था

चुनाव से पहले झारखंड की सरकार भले ही अरबों रुपये की योजना की घोषणा कर दे.

इसे भी पढ़ेंःआखिर किन कारणों से तीन जिलों के एसपी ने कोल ट्रांसपोर्टर सोनू अग्रवाल को दिया था 6 अंगरक्षक

ऐसी-ऐसी योजनाओं में पैसा पानी की तरह बहाया जा सकता है, जिसे वोट में आसानी से बदला जा सके. लेकिन सच यह है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था चरमरायी हुई है.

यूं कहें कि कर्ज में डूबी हुई है. झारखंड के बजट के आकार का राज्य का कर्ज हो गया है. पिछले वित्तीय वर्ष (2018-19) तक राज्य सरकार पर कर्ज बढ़कर चालू वर्ष (2019-20) के बजट आकार के करीब पहुंच चुका है.

साथ ही राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मुकाबले कर्ज बढ़कर 29.74% हो गया है. साल के अंत तक कर्ज बढ़कर बजट आकार से ज्यादा हो सकता है.

यह राज्य की वित्तीय स्थिति के लिए अच्छा संकेत नहीं है. ऐसा कहा जा सकता है कि 100 रुपये खर्च करने की योजना बनाने वाले पर 100 रुपये से अधिक का कर्ज हो गया है. जनवरी, 2019 में 2019-20 के लिए सरकार ने बजट का आकार 85429 करोड़ रुपये तय किया था.

दूसरी तरफ राज्य सरकार ने ही 2018-19 की समाप्ति यानी 31 मार्च 2019 तक कर्ज का कुल बोझ बढ़कर 85234 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

ऐसे में दोबारा गैस सिलेंडर रीफील की घोषणा के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या वाकई झारखंड इतने पैसों का अतिरिक्त बोझ उठाने को तैयार है ?

इसे भी पढ़ेंःतिलमिलाया पाकिस्तान,  भारत के साथ राजनयिक संबंध का दर्जा घटाया , भारतीय उच्चायुक्त को भारत लौटने को कहा  

advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button
Close