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तो क्या आर्थिक मोर्चे पर फेल हो रही मोदी सरकार

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Girish Malviya

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 7 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है, जून में भी रिजर्व बैंक ने ग्रोथ का अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7.0 फीसदी कर दिया था.

लेकिन अब उसने वृध्दि दर को और नीचे लाकर यह दर्शा दिया है कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार बुरी तरह से फेल साबित हुई है. विश्व की जितनी भी बड़ी रेटिंग एजेंसिया हैं उन्होंने भारत के GDP ग्रोथ के अनुमान में पिछले कुछ महीनों में माइनस मार्किंग ही की है.

महीने की शुरुआत में ग्लोबल रेटिंग फर्म क्रिसिल ने भारत के GDP ग्रोथ के अनुमान को 0.20 फीसदी घटा दिया, कमजोर मॉनसून, सुस्त ग्लोबल ग्रोथ और कमजोर नतीजों की वजह से क्रिसिल ने भी भारत की GDP ग्रोथ 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.

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पिछले महीने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया था. जारी आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में यह 7 प्रतिशत रह सकती है.

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जुलाई में ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के 2019-20 के आर्थिक वृद्धि (जीडीपी ग्रोथ) के अनुमान को आंशिक रूप से कम करके 7 फीसदी कर दिया है. पहले अपने आउटलुक में IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 2019-20 में 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया था.

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच (FITCH) पहले ही मोदी सरकार को जोरदार झटका दे चुका है. फिच ने वित्त वर्ष 2020 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ को घटा दिया था. फिच (FITCH) ने भारत के विकास दर अनुमान में 0.2 फीसदी तक की कटौती की थी.

इसी के साथ फिच (FITCH) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ को 6.6 फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया है. पहले भी मार्च में फिच ने भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अपना अनुमान 7 फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था.

फिच कहता है कि हमने अगले वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ के अनुमान को कम कर दिया है और इसकी वजह से आर्थिक गतिविधियों में उम्मीद से कम की रफ्तार है.

वैसे अंधभक्तों को अभी कश्मीर में प्लॉट खरीदने से ही फुरसत नहीं मिल पा रही है, वो यह सब कहां से समझेंगे भला !

(लेखक आर्थिक मामलों के सलाहकार हैं,ये इनके निजी विचार हैं)

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