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क्या पक्ष और विपक्ष दोनों सदन चलने नहीं देना चाहते ?

मॉनसून सत्र के दूसरे दिन दो पाली मिला कर 29 मिनट ही चली सदन की कार्यवाही

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Akshay Kumar Jha

RanchI: मॉनसून सत्र का दूसरा दिन. सुबह 11.05 बजे.

विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव सदन में दाखिल होते हैं. अभी कुर्सी भी नहीं संभाली थी कि नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन अपने कुर्सी से खड़े होते हैं और अध्यक्ष से अपनी बात रखने की इजाजत मांगते हैं. इजाजत है भी या नहीं इसकी परवाह किए बगैर एक ऐसे विषय पर बहस करने की बात करते हैं, जो पहले ही विधेयक का रूप ले चुका है. यानि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल. हेमंत विपक्ष के नेता होने की पीड़ा बताते हैं. कहते हैं वो अपनी बात सदन में नहीं रखेंगे तो क्या करेंगे. कहां रखेंगे.

जनता का सवाल अगर सदन में नहीं पूछा जाएगा तो कहां पूछेंगे. बार-बार विधेयक को रद्द और उसपर बहस करने की बात करते हैं. जबकि इस मामले में मुख्यमंत्री रघुवर दास और सत्ता पक्ष के नेता साफ कर चुके हैं कि इस विधेयक पर बहस नहीं हो सकती, क्योंकि राष्ट्रपति की तरफ से इसपर मुहर लग चुकी है. विधानसभा की कार्यमंत्रणा की बैठक में भी सत्ता और विपक्ष के बीच क्या होना है साफ हो चुका था.  हेमंत लगातार चार तक मिनट इस विषय पर बोलते हैं.

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समय 11.09 बजे

इस बीच दो मिनट का वक्त विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव लेते हैं. वो सभी विधायकों से सदन चलने देने की अपील करते हैं. कहते हैं, सभी को सदन चलने देने पर विचार करना चाहिए. विचार-विमर्श का एक मापदंड होना चाहिए. विधायिका की प्रक्रिया के अनुरूप बहस होनी चाहिए. साथ ही कहा कि अगर सभी की सहमति है तो उन्हें अवसर देने में कोई परेशानी नहीं है. इतना कहते हुए वो संसदीय कार्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को इस मामले पर बोलने का आग्रह करते हैं.

समय 11.12

क्या संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष को उकसाने का काम किया ?

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11.12 बजे संसदीय कार्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा भूमि अधिग्रहण बिल पर बहस को लेकर बोलना शुरू करते हैं. बड़ी नम्रता से बात की शुरुआत करते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार मानती है कि कई विषय गंभीर हैं. सभी पर सदन में बात होनी चाहिए. गंभीर मामलों पर तो खास कर बात होनी ही चाहिए. उन्होंने साफतौर से कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष पर चर्चा करना चाह रही थी. लेकिन उस वक्त विपक्ष ने चर्चा नहीं होने दी. अब जब से बिल राष्ट्रपति की सहमति के बाद राज्यपाल की अनुमति से सदन में आया है, तो विपक्ष बहस करना चाह रहा है. जबकि यह भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल अब विधेयक का रूप ले चुका है. विपक्ष कुछ नहीं घड़ियाली आंसू बहा रहा है. सदन नहीं चलने देने का विपक्ष की यह चाल है.

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समय 11.14

संसदीय कार्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा की बात सुनते ही सदन में हंगामा होने लगा. विपक्ष खेमे से नारेबाजी शुरू हो गयी. ‘भूमि अधिग्रहण बिल को वापस लेना होगा-लेना होगा’. वहीं सत्ता पक्ष की तरफ से भी विरंची नारायण समेत कई विधायक अपनी जगह पर ही खड़े होकर एक अखबार की खबर लहरा कर कहने लगे,  कि जेएमएम के लोगों ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया है. सभी की जांच की मांग करते हैं. सदन में इस सीन को सभी ने सात मिनटों तक देखा. विधानसभा अध्यक्ष की आवाज हंगामे के बीच दब गयी और 19 मिनट सदन चलने के बाद 11.21 बजे 12.30 मिनट तक के लिए स्थगित हो गया.

समय 12.34 बजे

विधानसभा अध्यक्ष सदने में दाखिल होते हैं. किसी की कोई बात सुनता इससे पहले हंगामा शुरू हो गया. विपक्ष भूमि अधिग्रहण बिल पर बहस को लेकर हंगामा करने लगा. इधर इस बार सत्ता पक्ष के भी विधायक सुखाड़ के मुद्दे को लेकर हंगामा करने लगा. सदन में दो तरह के नारे गूंज रहे थे. विपक्षः भूमि अधिग्रहण बिला को वापस लेना होना-लेना होगा. दूसरा सुखाड़ पर चर्चा करना होगा-करना होगा. विपक्ष के सारे विधायक एक-एक कर वेल में आ जाते हैं.

समय 12.39 बजे

पहली बार देखा गया कि सत्ता पक्ष के विधायक भी वेल में आ गए. विधायकों का साथ सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर भी थे. नारेबाजी से सदन गूंज रहा था. तभी सत्ता पक्ष के विधायकों को सीएम की तरफ से इशारा होता है और सभी वेल से फिर अपनी कुर्सी पर आ जाते हैं. अध्यक्ष के बार-बार कहने पर विपक्ष भी कुर्सी पर आ जाता है.

12.40 बजे

विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव फिर से एक बार विधायकों को शांत रहने का और सदन को चलने देने का पाठ पढ़ाते हैं. हंगामे के बीच अनुपूरक बजट पेश किया जाता है. अनुपूरक बजट की औपचारिकता शोर के बीच जल्दीबाजी में सदन के पटल पर रख दी जाती है. और दूसरी पाली में सदन 10 मिनट तक चलने के बाद 12.44 बजे बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित हो जाती है. कुल मिला कर मॉनसून सत्र के दूसरे दिन दो पाली मिला कर 29 मिनट सदन की कार्यवाही चली.

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