
Ranchi: सुमित्रा लक्ष्मण डेवलपमेंट सोसायटी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने एक समिति बनाकर एनटीपीसी के पकड़ी बरवाडीह के कोल माइंस के फॉरेस्ट क्लीयरेंस की जांच करायी.
जांच के बाद समिति ने जिस तरह की रिपोर्ट एनजीटी को दी है, उसमें साफ तौर से देखा जा रहा है कि एनटीपीसी की कोल माइंस में वन विभाग के नियमों को ताक पर रखकर कंपनी कोल खनन का काम कर रही है.
ऐसी कई चीजें देखने को मिलीं, जो कानूनन सही नहीं है, फिर भी कोल खनन का काम धड़ल्ले से चल रहा है. समिति में मेंबर सेक्रेटरी (SEIAA) कमलेश पांडेय, साइंटिस्ट राजीव रंजन और JSPCB के रिजनल अफसर अशोक कुमार यादव शामिल हैं. समिति ने यह रिपोर्ट 15 मार्च को पकड़ी बरवाडीह जाकर जांच कर तैयार की है.
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समिति ने कई चीजों को माना अधूरा
– खनन इलाके में पुराने पेड़ सूख रहे हैं. जिस तरह से मिट्टी का कटाव हो रहा है, उसके लिए उतना बीजारोपण नहीं हुआ जितने की जरूरत है.
– बिना चेक डैम बने ही, एनटीपीसी ने अपने कंस्ट्रक्शन के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया.
– टो वॉल और रिटेंशन वॉल की लगातार मरम्मत करने की जरूरत है, जो नहीं हो रहा है.
– खनन के दौरान ओबी (ओवर बर्डन) को कहां रखा जाना है, इस बारे में कंपनी ने किसी तरह की कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी है.
– खनन के बाद कोयले को 20 मीटर चौड़े कन्वेनर बेल्ट से खनन इलाके से ट्रांसपोर्टेशन साइडिंग तक ले जाया जाना था. कन्वेनर बेल्ट की ऊंचाई इतनी होनी चाहिए, कि हाथी जैसे ऊंचे जानवर को भी तकलीफ ना हो. लेकिन फिलहाल कोयले की ढुलाई ट्रक से की जा रही है. कन्वेयर लगने में अभी लंबा समय लगेगा.
– एनटीपीसी को तीन अगस्त 2009 तक, वनाधिकार कानून 2006 के मुताबिक, सारे सेटेलमेंट्स विभाग को सौंपे जाने थे. लेकिन जांच होने तक कंपनी ने यह कागजात नहीं सौंपे हैं. इसी वजह से जांच कर रही समिति ने इस मामले पर किसी तरह का कोई कमेंट करने से इनकार कर दिया.
– सुरक्षित जोन की पहचान अभी तक नहीं की गयी है. जमीन पर कहीं भी ऐसे जोन दिखायी नहीं दिये. यहां तक कि फेंसिंग का काम भी कंपनी की तरफ से नहीं किया गया है, ना ही रिजेनरेशन का काम खनन करने वाली कंपनी की तरफ से किया जा रहा है.
– खनन करने वाली कंपनी एनटीपीसी ने उतना पौधारोपण नहीं किया है, जितने क्षेत्र में कंपनी खनन का काम कर रही है. इसलिए समिति ने कंपनी से कहा है कि जल्द से जल्द कंपनी सभी खाली जगहों का पता लगाकर वहां पौधारोपण कराये. लीज एरिया या बाहर के क्षेत्र में जहां भी रोड के किनारे खाली जमीन है, वहां पौधारोपण का काम किया जाये.
– करार के मुताबिक कंपनी द्वारा पकवा नाला और दुमहानी नाला के आस-पास ग्रीन बेल्ट का निर्माण किया जाना था. लेकिन जांच में पाया गया है कि कंपनी ने दोनों नदियों के किनारे ग्रीन बेल्ट का निर्माण नहीं किया है. इतना ही नहीं, खोरा नाला के पास कंपनी डंपिंग का काम कर रही है जिससे नदी में ओबी भी प्रवाहित हो रही है.
– कंपनी की तरफ से विस्थापितों की कोई ऐसी सूची नहीं दी गयी, जिससे पता चले कि कितने विस्थापितों को अभी तक कंपनी ने बसाया है. वहीं जांच समिति ने पाया है कि कंपनी की तरफ से विस्थापितों के लिए आवास, अस्पताल और स्कूल बनाये गये हैं. लेकिन किसी भी आवास में विस्थापित रह नहीं रहे हैं. सभी के सभी खाली हैं.
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