
NewDelhi : शराब कारोबारी विजय माल्या कर्ज लौटाने का कोई इरादा नहीं रखता. भारत की बैंकों से लगभग 9000 करोड़ रुपये कर्ज लेकर विदेश भाग गये 62 वर्षीय विजय माल्या के बारे में यह खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने किया है. ईडी द्वारा किंगफिशर की जांच में यह सामने आया है कि माल्या का कंसोर्टियम से लिये गये 5,500 करोड़ रुपये देने का कोई इरादा नहीं था. वह शुरू से ही कर्ज का पैसा विदेश भेजने लगा था. जांच में पता चला है कि कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की गयी. फिर भी माल्या ने मुनाफे में चल रही यूनाइटेड ब्रेवरीज और समूह की अन्य कंपनियों की पूंजी को एयरलाइंस में नहीं लगाया. बावजूद इसके उसने यूनाइटेड ब्रेवरीज से किंगफिशर को 3,516 करोड़ का अनसिक्योर्ड कर्ज दिया.
जिसके कारण किंगफिशर की वैल्यू और भी घट गयी. ईडी के अनुसार किंगफिशर को एसबीआई, पीएनबी और एक्सिस बैंक ने 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. माल्या ने इन पैसों का बड़ा हिस्सा विमानों के लीज रेंट और रखरखाव के नाम पर विदेश भेजना शुरू कर दिया था. इतना ही नहीं उसने लीज रेंट को बढ़ा चढ़ाकर भी बताया था.
माल्या ने शुरू से ही कर्ज का पैसा विदेश भेजना शुरू कर दिया था
ईडी की जांच में पता चला है कि माल्या ने शुरू से ही कर्ज का पैसा विदेश भेजना शुरू कर दिया था. जांच में पता चला है कि साल 2010 में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद बैंकों ने बकाया मूलधन 6,000 करोड़ रुपये से घटाकर 5,575.72 करोड़ रुपये कर दिया था. इसके बाद दिसंबर 2010 में बंधक शेयरों का हिस्सा बेचकर कुछ रकम जुटाई गयी. जिसके बाद मूलधन को और घटाकर 4,930.34 करोड़ रुपये कर दिया गया था. ईडी का कहना है कि किंगफिशर को बार-बार याद दिलाया गया कि लीज से संबंधित दस्तावेज मुहैया कराये लेकिन कंपनी की तरफ से कोई कार्यवाई नहीं की यी. ईडी ने निष्कर्ष निकला है कि इस बात की योजना पहले से ही बना ली गयी थी कि बैंकों से बड़ी मात्रा में कर्ज लेना है. इस राशि को जालसाजी कर देश के बाहर ठिकाने लगा दिया गया. विजय माल्या जानबूझकर कंपनी पर कर्ज बढ़ाता जा रहा था,जबकि कंपनी घाटे में चल रही थी.
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