
Dhanbad : धनबाद कारा कुख्यात और अपराधियों के साथ- साथ बड़े-बड़े माफियाओं का अड्डा बन चुका है. यहां कोई भी अपराधी या फिर बड़े माफिया जेल में बैठे-बैठे बड़े अपराध को वारदात दे सकते हैं. ना तो
इन्हे पुलिस का डर है और ना ही किसी गिरोह का. कारण भी साफ है, गैंग्स ऑफ वासेपुर के नामचीन अपराधियों के साथ-साथ कई राजनीतिक माफिया और कुख्यात शूटर धनबाद जेल में बंद हैं. यहीं से आसानी से बड़े बड़े अपराध की योजना को अंतिम रूप देने में लगे हैं.
जेल प्रबंधन की लापरवाही के कारण हुई रंजीत सिंह की हत्या
जिला प्रशासन के द्वारा भी जेल में छापेमारी निरंतर होती रहती है लेकिन सिर्फ खैनी, बीड़ी और सिगरेट के अलवाल कुछ नहीं मिलता है. धनबाद एसपी के द्वारा भी कई बार जेल में छापामारी की जाति है, लेकिन पुलिस को कुछ भी हांथ नहीं लगती और पुलिस बैरंग ही लौट जाती है.
धनबाद जेल के भीतर जहां एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता है. वहां हत्या की साजिश रची जाति है और पुलिस को इसकी भनक भी नहीं लगती है या लगी भी हो तो पुलिस इन माफियाओं के सामने नतमस्तक हो गयी. ताजा मामला जेवीएम नेता सह बीकेबी कंपनी के प्रबंधक रंजीत सिंह हत्याकांड से जुड़ा है. हत्याकांड का ब्लू प्रिंट गैंग्सटर फहीम के भांजे प्रिंस ने इसकी प्लानिंग की थी. जेल में आकर प्रिंस से मुलाकात की थी. जिसके बाद प्रिंस के कहने पर शूटर की भूमिका निभाने वाले औरंगजेब और शमशाद ने हथियार जुटाया और हत्याकांड को अंजाम दिया. जो कि धनबाद पुलिस के अनुसंधान से साफ हो चुका है.
इसे भी पढ़ेंः एशियन गेम्स : ‘सिल्वर’ जीत मधुमिता ने बढ़ाया झारखंड का मान, सरकार देगी 10 लाख
पहले भी धनबाद जेल से कई व्यवसाइयों दी गयी है धमकी
रंजीत हत्याकांड से पूर्व भी जिले के कई व्यवसायियों ने धनबाद जेल से गैंगेस्टर के द्वारा रंगदारी मांगने की शिकायत दर्ज की जा चुकी है. कुछ वर्ष पूर्व गैंगेस्टर फहीम ने भी अपने भांजे को लेकिन फिर भी धमकी दी. ऐसे में कहीं न कहीं कारा विभाग को जेल की आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा जरूर करनी चाहिए.




