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पूर्व मंत्री समरेश सिंह रिहा, झामुमो चुनाव चिन्ह के फर्जी नामांकन का था मामला, 19 सालों तक चली मुकदमे की कार्रवाई

Dhanbad : फर्जीवाड़ा कर झामुमो के चुनाव चिन्ह पर 12वीं लोकसभा चुनाव में नामांकन करने के मामले में पूर्व मंत्री समरेश सिंह को कोर्ट ने 3 जनवरी को रिहा कर दिया. समरेश सिंह को दो दशक से लंबित चल रहे दो मामलों में रिहाई मिली है. समरेश के जेल से बाहर आने के बाद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी के साथ उनका स्वागत किया. गौरतलब है कि कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर साक्ष्य के अभाव में समरेश सिंह को रिहा करने का आदेश दिया. इधर जेल से निकलने के बाद देर शाम समरेश सिंह समर्थकों का अभिववादन करते हुए बोकारो के लिए रवाना हो गये.

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इस मामले के दो आरोपी पहले ही हो चुके हैं रिहा

फर्जी सिंबल मामले में दो आरोपी जय प्रकाश चौरसिया और गौरीशंकर अग्रवाल पहले ही कोर्ट से रिहा हो चुके हैं. हांलाकि इस मामले में सफाई साक्ष्य के दिन ही समरेश सिंह कोर्ट से गैर हाजिर हो गए थे. वहीं उसी दिन कोर्ट ने समरेश सिंह के बेलबांड को खारिज कर दिया गया था . साथ ही बाद में कोर्ट ने उन्हें फरार घोषित भी कर दिया था. उल्लेखनीय है कि निर्वाची पदाधिकारी ने धनबाद थाना में इस मामले को लेकर समरेश सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. साल 1999 में जो प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी उसमें यह आरोप था कि लोकसभा चुनाव के समय समरेश सिंह ने बतौर प्रत्याशी नामांकन किया था.

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क्या है मामला

28 जनवरी 1998 को समरेश सिंह ने धनबाद लोकसभा सीट से खुद को झामुमो प्रत्याशी बताकर नामांकन दर्ज किया था. जिसके बाद जब नामांकन पक्ष की जांच की जा रही थी तो झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने चुनाव आयोग को बताया था कि समरेश सिंह धनबाद से उनके अधिकृत प्रत्याशी नहीं है. तब तत्कालीन उपसमाहर्ता महर्षि राम की शिकायत पर समरेश सिंह के साथ उनके प्रस्तावक जयप्रकाश चौरसिया औरल गौरीशंकर अग्रवाल के विरुद्ध अदालत में शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत दर्ज कराने के बाद मुकदने की कार्रवाई 19 सालों तक चली. जिसमें मामले के दो आरोपी जयप्रकाश चौरसिया और गौरीशंकर अग्रवाल पहले ही रिहा किया जा चुका है. इस मामले में समरेश सिंह की ओर से अधिवक्ता राधेश्याम गोस्वामी और प्रभाष चौधरी ने पैरवी की. 

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