
Ranchi. राज्य में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. मरीजों की संख्या बढ़ने से सरकारी अस्पतालों में बेड भी करीब-करीब भर गई है. मरीज अब कोरोना पॉजिटिव सरकारी रिकार्ड में नहीं होना चाह रहे हैं. पर यह जानने के लिए कि वे पॉजिटिव है या नहीं वे अपनी एंटीबॉडी जांच करा रहे हैं.
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प्राइवेट लैब में एंटीबॉडी जांच कराने वालों की संख्या बहुत बढ़ गयी है. वहीं प्राइवेट कोरोना जांच की फीस भी एंटीबॉडी टेस्ट से कहीं अधिक है. एंटीबॉडी टेस्ट से वे कोरोना से संक्रमित हुए हैं या नहीं यह भी पता चल जा रहा है.
कोरोना जांच के लिए 2400 और एंटीबॉडी के लिए 1250
कोरोना जांच कराने के लिए सरकारी केंद्रों में बहुत भीड़ लग रही है. रांची में रिम्स और सदर अस्पताल दोनों में प्रतिदिन 400 से अधिक लोग पहुंच रहे हैं. इसलिए इस भीड़ से बचने के लिए लोग प्राइवेट में पहुंच रहे हैं. प्राइवेट लैब में एंटीबॉडी टेस्ट का विकल्प देखने के बाद लोग कोरोना टेस्ट कराने के बजाय एंटीबॉडी टेस्ट कराना ज्यादा उचित समझ रहे हैं.
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इसके पीछे एक और वजह हो सकती है. कोरोना के लिए आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए 2400 और एंटीबॉडी के लिए मात्र 1250
रुपये लग रहे हैं. एंटीबॉडी टेस्ट भी दो तरीके का है. कोविड टोटल एंटीबॉडी टेस्ट के लिए 950 रुपये और कोविड आईजीजी एंटीबॉडी टेस्ट के लिए 1250 रुपये लग रहे हैं.
जब घर पर ही रहना है तो क्यों कराये कोविड टेस्ट
प्राइवेट लैब में एंटीबॉडी टेस्ट कराने पहुंचे कुछ लोगों ने बताया कि अगर घर पर ही रहना है तो कोविड टेस्ट क्यों करायें. कोविड पॉजिटिव आने पर या तो उन्हें घर पर रहना होगा या फिर उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होना होगा.
सरकारी अस्पतालों में बेड हैं नहीं और इंस्टीट्यूशनल आइसोलेशन सेंटर में व्यवस्था सही नहीं है. इसलिए, कम पैसे में एंटीबॉडी टेस्ट कराकर खुद आइसोलेशन में रहना ज्यादा बेहतर है.




