
New Delhi: गुरुवार को लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता 2019 बिल पेश किया गया. संसद के मंजूरी के बाद ये बिल कानून बन जायेगा. इस बिल के पास होने के बाद वैसी कंपनियां जहां कर्मचारियों की संख्या एक सौ या उससे ऊपर है, वो कॉन्ट्रैक्ट की अवधि खत्म होने के बाद कर्मचारियों की छंटनी कर सकेगी.
लेबर मिनिस्टर संतोष गंगवार ने गुरूवार को लोकसभा में ‘औद्योगिक संबंध संहिता, 2019’ और उससे संबंधित एक विधेयक पेश किया जिसमें श्रमिक संघ, औद्योगिक प्रतिष्ठानों या उपक्रमों में रोजगार की शर्तें, औद्योगिक विवादों की जांच तथा निपटारे एवं उनसे संबंधित विषयों के कानूनों को मिलाने का और संशोधन करने का प्रावधान है.
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इस बिल में चार लेबर कोड बनाया गया है. जिनमें मजदूरी पर कोड, औद्योगिक संबंधों(इंडस्ट्रियल रिलेशन) पर कोड, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों पर कोड और सामाजिक सुरक्षा पर कोड शामिल है. इस कानून के लागू होने के बाद ट्रेड यूनियन एक्ट 1926, इंडस्ट्रियल एंप्लॉयमेंट एक्ट 1946 और इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट 1947-तीनों बिल इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल 2019 में समाहित हो जाएंगे.
बिल की खास बातें
बता दें कि फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेन्ट का संबंध उन कर्मचारियों से है जिन्हें किसी भी अवधि के लिए हायर किया जा सकता है. यह सीजन और ऑर्डर के आधार पर तीन महीने से लेकर 6 महीने तक का हो सकता है. इस कोड में दो सदस्यीय ट्राइब्यूनल (Tribunal) बनाने का प्रावधान भी किया गया है. पहले इसमें एक सदस्यीय ट्राइब्यूनल ही था.
इसके साथ ही किसी कंपनी को किसी वर्कर को निकालने से पहले 1 महीने पहले नोटिस देना होगा. वहीं अगर कंपनी बंद होती है तो 2 महीने का नोटिस देना होगा साथ ही मुआवज़ा भी देना होगा.
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आरएसपी, टीएमसी ने किया विरोध
इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल 2019 पेश किये जाने का विरोध करते हुए आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय और कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने इसे कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार से इसे श्रम पर संसदीय स्थाई समिति को भेजने की मांग की.
प्रेमचंद्रन ने कहा कि इसमें राज्यों से जरूरी परामर्श नहीं किया गया है. जबकि टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि किसी मजदूर संगठन ने इस संहिता की मांग नहीं की थी और उद्योग संगठन चाहते थे, इसलिए सरकार इसे लेकर आई है. इसे ‘श्रमिक विरोधी’ बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे श्रम पर स्थाई समिति को भेजा जाना चाहिए.
अधीर रंजन चौधरी ने भी इसे ‘श्रमिक विरोधी’ बताते हुए स्थाई समिति को भेजने की मांग की. वहीं लेबर मिनिस्टर गंगवार ने कहा कि सरकार लंबी चर्चा और श्रम संगठनों तथा सभी राज्य सरकारों से परामर्श के बाद औद्योगिक संबंध संहिता लेकर आई है. इसमें कोई भी प्रावधान मजदूरों के हक के खिलाफ नहीं है. जिसके बाद उन्होंने ‘औद्योगिक संबंध संहिता, 2019’ को सदन में पेश किया.
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