JharkhandRanchi

कोल इंडिया ने ली है 19594 एकड़ जमीन, बोले हेमंत- 19 वर्षों में किसी सरकार ने इसके जबड़े से निकाले 250 करोड़

विज्ञापन
  • केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी पहुंचे रांची, सीएम से मुलाकात कर भुगतान किया 250 करोड़ रूपये का चेक
  • सीएम ने कहा, अधिग्रहित भूमि के लिए रैयतों को समुचित मुआवजा एवं पुनर्वास देने की रखी मांग
  • खनन से राज्य को अगले 4 वर्षों में लगभग 18,800 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा : अर्जुन मुंडा

Ranchi : कोल इंडिया द्वारा राज्य में किये जा रहे खनन के एवज में झारखंड सरकार को राजस्व के रूप में 250 करोड़ रुपये मिले हैं. एक दिवसीय राज्य दौरे पर गुरूवार को रांची पहुंचे केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 250 करोड़ रूपये का चेक सौंपा.

इस दौरान सीएम ने केंद्रीय मंत्री को धन्यवाद दिया. साथ ही बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा है कि पहली बार किसी सरकार ने कोल इंडिया के जबड़े से राज्य के बकाया राजस्व हिस्से की राशि ली है. इससे पहले कोल ब्लॉक नीलामी में राज्य सरकार के रूख, बकाया राजस्व सहित भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे को लेकर प्रोजेक्ट भवन में दोनों नेताओं ने एक उच्चस्तरीय बैठक की.

advt

बैठक में जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री सह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा सहित कई अधिकारी भी उपस्थित थे. इस दौरान सीएम सोरेन ने कोयला खनन के राजस्व के हिस्से के रूप में बकाया राशि से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया.

सीएम ने कहा है कि बैठक में कोल इंडिया ने खनन के लिए आज तक जितनी भी सरकारी भूमि अधिग्रहित (19594 एकड़) की है, उसके एवज में जमीन की कीमत का भुगतान आज तक नहीं किया गया. यह राशि करीब-करीब 8226 करोड़ तक है, जो कि विगत 1 जुलाई 2009 से 31 अप्रैल 2019 अंतर्गत अधिग्रहित 14,296 एकड़ सरकारी भूमि के एवज में 5439 करोड़ तथा 5298 एकड़ जंगल-झाड़ी भूमि के एवज में 2787 करोड़ रुपये बनती है.

यह मुद्दा पिछले 19 वर्षों से अटका पड़ा था. इन वर्षो में अधिकांश समय बीजेपी की सरकार रही, लेकिन उन्होंने राज्य के विकास को ध्यान में रखकर इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला. पिछले छह माह से वे इस बात को प्रमुखता से उठा रहे. आज सरकार के प्रयासों का सकारात्मक रिजल्ट मिला है. केंद्रीय कोयला मंत्री ने सरकार को 250 करोड़ की राशि सौंपी. साथ ही बकाया राशि के जल्द भुगतान की बात की.

adv

अर्जुन मुंडा ने बताया कि बैठक में झारखंड की लाइफ लाइन खनन से जुड़े मुद्दों को जल्द सुलझाने पर मंत्रणा हुई. खनन से राज्य को अगले 4 वर्षों में लगभग 18,800 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा

इसे भी पढ़ें – रांची के निजी अस्पताल पूरे एक फ्लोर को बना रहे कोविड डेडिकेटेड अस्पताल

कोल ब्लॉक नीलामी पर केंद्रीय मंत्री के दिये सुझाव पर सरकार करेगी विचार

कोल इंडिया ने ली है 19594 एकड़ जमीन, बोले हेमंत- 19 वर्षों में किसी सरकार ने इसके जबड़े से निकाले 250 करोड़कोल ब्लॉक नीलामी पर झारखंड सरकार के रूख औऱ केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के दिये सुझाव के सवाल पर सीएम सोरेन ने कहा कि उन्हें यह बताया गया कि क्यों सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है. केंद्रीय मंत्री ने यह माना कि संवाद में कमी होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है.

उन्हें बताया गया कि राज्य सरकार सकारात्मक सोच से काम कर रही है. अब चूंकि केंद्रीय मंत्री ने कोल ब्लॉक नीलामी को लेकर सुझाव देकर इसपर विचार की बात की है, तो सरकार उसपर जरूर विचार करेगी. बैठक में जिन बातों की ओर ध्यान दिलाया गया, उसमें प्रमुखता से शामिल है.

  • 1 अप्रैल 2009 से पहले एवं 1 अप्रैल 2019 और 21 मार्च 2020 तक कई एकड़ सरकारी जमीन को कोल इंडिया ने अधिग्रहित किया है. उस भूमि के एवज में कोल इंडिया लिमिटेड ने जो भुगतान नहीं किया है. इसपर केंद्रीय मंत्री ने जल्द भुगतान की बात कही.
  • कोयला खनन से संबंधित भूमि पर कोल इंडिया के द्वारा विस्थापितों को बसाने में भी काफी समस्याएं हो रही है. इस बाबत केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कर इसके समाधान की बात की गयी.
  • अधिग्रहित भूमि के लिए रैयतों को समुचित मुआवजा एवं पुनर्वास की व्यवस्था की बात भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी.
  • कोल इंडिया कंपनियों के द्वारा washed coal की बिक्री दर के आधार पर रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया जा रहा है. इससे राज्य सरकार को हो हानि हो रही है. जिसका जल्द निपटारा की जाने की बात की गयी.
  • उत्खनन के बाद ऐसे ही बंद पड़े खदान से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है. ऐसे में जरूरी है कि पर्यावरण नियम के अनुसार उन्हें समतल कर उनपर वृक्षारोपण करने की ओर केंद्र सरकार कदम उठाये.

इसे भी पढ़ें –अगले तीन दिनों में की जायेगी शुगर, बीपी व अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित 36 हजार मरीजों की कोरोना जांच

250 करोड़ सहित अलग-अलग जिलों के लिए भुगतान किया गया 48 करोड़

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, ट्रांसपोर्ट और राजस्व को लेकर केंद्र और राज्य के बीच कुछ विवाद था, जिसे आज की बैठक में दूर करने की कोशिश हुई. बैठक में यह निर्णय हुआ कि राज्य की जो भी भूमि केंद्र ने ली है या ली जायेगी, उसका केंद्र कृषि योग्य भूमि के मूल्य के आधार पर मुआवजा का भुगतान झारखंड को करेगी.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य की 1800 हेक्टयर भूमि केंद्र के पास है, उसका भी पुर्नविचार करके तुरंत इसका भुगतान किया जायेगा. शुरूआत के तौर पर पहले के बकाया कुल 250 करोड़ के अलावा अलग-अलग जिलों के लिए 480 करोड़ (करीब 300 करोड़) रुपये राज्य सरकार को दिया गया है.

प्रहलात जोशी ने कहा कि इस दौरान कोल ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया में झारखंड सरकार की आपत्तियों पर भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत हुई.  इस बाबत बैठकर केंद्र से सहयोग करने का भी सुझाव दिया गया.

इसे भी पढ़ें –Corona: 371 नये संक्रमित मिले, झारखंड का आंकड़ा हुआ 10399

advt
Advertisement

5 Comments

  1. Very good article! We are linking to this particularly great content on our site. Keep up the great writing.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
Close