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सीजेआइ ने पीएम मोदी को लिखी तीन चिट्ठी, कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का सुझाव

New Delhi: देश की अदालतों में पेंडिंग केस का बोझ लगातार बढ़ रहा है. और इससे निपटने के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन चिट्ठियां लिखी हैं.

चिट्ठी में मुख्य न्यायाधीश ने पीएम मोदी से जजों की संख्या को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ दो संवैधानिक संशोधनों का अनुरोध किया है.

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जजों की संख्या बढ़नी चाहिए

चिट्ठी में सीजेआई गोगोई ने बढ़ते लंबित मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा कि पेंडिंग केस के निपटारे के लिए जजों की संख्या बढ़नी चाहिए.

उन्होंने पीएम मोदी से अनुरोध किया है कि एक तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी हो जो फिलहाल 31 है. दूसरा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष हो.

वहीं अपने तीसरे पत्र में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पीएम मोदी को संविधान के अनुच्छेद 128 और 224ए के तहत सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कार्यकाल की पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करने की मांग की है. जिससे वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा किया जा सकता है.

लंबित केसों का कोर्ट पर भारी बोझ

प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ कहा है कि संविधान संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए जरूरी है कि पांच जजों की कई संविधान पीठ बनाई जाये, लेकिन फिलहाल जजों की सीमित संख्या में ये बहुत मुश्किल है.

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उल्लेखनीय है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में जजों के 31 पद स्वीकृत हैं, और इतने ही जज हैं. वहीं सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अभी हाई कोर्ट्स में करीब 44 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 58,700 मामले लंबित पड़े हैं.

सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सीजेआई गोगोई ने बताया कि 26 केस 25 सालों से, 100 केस 20 सालों से, 593 केस 15 सालों से और 4977 केस पिछले 10 सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 31 से बढ़ाकर 37 करने की मांग की है.

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