Opinion

केंद्र सरकार से क्यों मायूस हैं राज्यों की सरकारें

Faisal Anurag

लॉकडाउन में बढते केंद्रीकरण की प्रवृति और निर्णयों को लेकर देशभर में न केवल अनेक राज्य सरकारों में मायूसी है, बल्कि कई फैसलों के विपरीत प्रभाव भी उभरकर सामने आने लगे हैं. इसका परिणाम ही यह है कि प्रवासी मजूदरों को मालगाड़ी ने निगल लिया है. बंद फैक्टरियां जब 40 दिन बाद खुल रही हैं, तो गैस रिसाव हो रहा है. 7 मई को देश के तीन फैक्टरियों में गैस रिसाव की घटना हुई.

यह भारत की बड़ी त्रासदी है, जिसे लेकर न केवल गुस्सा पैदा होना चाहिए, बल्कि उस चुप्पी को भी तोड़ना चाहिए, जिसे कोविड-19 के भय ने पैदा कर दिया है. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक में क्षोभ प्रकट करते हुए सवाल उठाया है कि उन्हें केंद्र से मदद नहीं मिल रही है.

और राज्य सरकारों को पैकेज नहीं दिया जा रहा है. यह हालत तब है जब प्रधानमंत्री ने 8 मार्च को राज्यों की मदद के लिए 1 लाख 87 हजार करोड देने की बात कही थी. राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस में यह कहा है. राहुल गांधी ने तो यहां तक कहा है कि भाजपा शासित कई राज्यों के साथ भी यही हो रहा है, लेकिन वे खामोश हैं.

सवाल उठता है कि यदि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद भी राज्यों को उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है, तो महामारी में यह बेहद असामान्य बात है. यही नहीं राहुल गांधी के प्रेस कांफ्रेस में ही राजस्थान पत्रिका के संवाददाता ने कहा कि 8 करोड़ किसानों को मदद देने की जो बात प्रधानमंत्री ने की थी, उसे भी अमल में नहीं लाया गया है.

8 मई की इस प्रेस कांफ्रेस का यह चौंकाने वाला खुलासा है, जो बताता है कि इस समय जब कि एक बेहद संजीदा दौर है. सरकार की घोषणा के प्रति किस तरह का व्यवहार हो रहा है. अनेकों ने तो यह सवाल उठाया ही है कि भारत सरकार जिस तरह के निर्णय ले रही है कि उसमें अनेक केंद्रीकृत और अव्यवहारिक हैं.

पंजाब के मुखमंत्री ने तो यहां तक कहा है कि केंद्र ने जिन तीन जोन में इलाकों को बांटा है, पंजाब में उसमें कई खामी है. पंजाब के जिन इलाकों के रेड जोन बताया गया है, वास्तव में उनमें कुछ ऑरेंज जोन होने चाहिए और कुछ ऑरेंज जोन की स्थिति रेड जैसी है, जिन्हें रेड जोन ही होना चाहिए.

राहुल गांधी के अनुसार, ऐसा इसलिए हो रहा है कि राज्यों के साथ केंद्र का टीम स्पीरिट नहीं है. राज्यों की सूचनाओं का केंद्र इस्तेमाल नहीं कर रहा है. इस प्रवृति का बड़ा कारण वह केंद्रीकरण की चाह है, जिसे केंद्र हर हाल में अपनी ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

राहुल गांधी के इस सुझाव को गंभीरता से लेने की जरूरत है कि कोविड -19 के खिलाफ संघर्ष के लिए जरूरी है कि देश के डीएम-सीएम उतने ही मजबूत हों. उनके निर्णयों और सुझावों पर गौर किया जाये.

इस सुझाव का अर्थ यह है कि इस समय कोई भी एक मुक्तिदाता की छवि में हो सकता है. लेकिन उससे समस्या से निजात नहीं मिल सकता है.

माइग्रेंट लेबर की त्रासदी के बाद तो इस बात की जरूरत महसूस की जा रही है कि एक दूरगामी माइग्रेंट लेबर पॉलिसी होनी चाहिए. राहुल गांधी ने सवाल उठाया है कि जरूरत इस बात की है कि मजदूरों, गरीबों और किसानों को दस हजार रूपये दिए जायें. इसमें देर नहीं किया जाना चाहिए.

एम्स के निदेशक डॉ गुलेरिया ने आशंका जतायी है कि भारत में जून और जुलाई कोविड-19 का पीक पिरियड हो सकता है. उनकी आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता. ऐसे हालात में भारत में लॉकडाउन का भविष्य क्या होगा? क्योंकि जिस तरह भारत की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सुनामी आयी है, उसे बहुत देर तक नहीं टाला जा सकता.

इसके साथ ही मजूदरों की घर वापसी के बाद मध्यम और लघु उद्योगों के फिर से शुरू करने को लेकर चिंता बढ़ गयी है. जिस तरह भारत में मजदूरों ने भरोसा खोया है और तकलीफ झेला है, वह अकल्पनीय है.

डॉ रघुराम राजन ने ग्रामीण भारत के लिए जिस 65 हजार करोड़ रुपये की राशि के प्रावधान का सुझाव दिया है, उसे नकारना खतरनाक साबित होगा.

राहुल गांधी ने एक और बड़ी बात कही है कि केंद्र सरकार का सामान्य तरीका विपक्ष के सुझावों पर ध्यान देने या संवाद करने का नहीं है. उन्होंने यह भी कहा है कि इसे कांग्रेस पार्टी ने अब स्वीकार कर लिया है. अनेक विशेषज्ञों को भी लगता है कि उनके सुझावों को तो छोड़िए, उनसे संवाद की भी जरूरत महसूस नहीं की जाती है. एक तरह से इस नजरअंदाज की प्रवृति के कारण अनेक तरक के संकट पैदा हो रहे हैं.

राहुल गांधी की इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि आधे-अधूरे इकोनॉमी को नहीं खोला जा सकता है. उनके शब्दों में आधा या एक हिस्सा इंजन स्टार्ट नहीं हो सकता.

लघु और मध्यम उद्योंग, बड़े उद्योगों के भी आधार हैं. इस तथ्य को समझने की जरूरत है.

भारत सरकार ने सप्लाई चेन को जारी रखने का फैसला किया है. लेकिन रेड जोन को इससे बाहर रखा गया है. यदि नक्शें को देखा जाये तो रेड जोन से होकर ही कोई ग्रीन या ऑरेंज जोन में जाया जा सकता है.

इसलिए, इस संतुलन को बनाने के लिए बड़ी योजना की जरूरत है. इकोनॉमी की गतिविधि के लिए जरूरी है कि लघु और मध्यम उद्योगों के लिए तुरंत 1 लाख करोड़ का पैकेज दिया जाये. राहुल गांधी का यह सुझाव इस सेक्टर की मांग के अनुरूप ही है.

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