
Ranchi: झारखंड में पिछले 120 दिनों के दौरान 565 हत्या की घटनाएं हुई. झारखंड औसतन हर दिन 4 हत्याएं हो रही है. झारखंड पुलिस से प्राप्त आंकड़ों से इन हत्याओं का खुलासा होता है. ये आंकड़े झारखंड पुलिस के अनुसार जनवरी से लेकर अप्रैल तक के हैं.
जिनमें जनवरी 158,फरवरी 142, मार्च 145 और अप्रैल 120 हत्या की घटनाएं हुई हैं. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक झारखंड में हत्या की घटनाएं में कमी आयी है. इसके पीछे का वजह है कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन का होना.
लॉकडाउन छूट मिलने के बाद राज्य में बढ़ा अपराध का ग्राफ
लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद राज्य में अपराध के ग्राफ में भी बढ़ोत्तरी हुई है. लॉकडाउन में सख्ती के दौरान राज्य में अपराधिक घटनाओं में कमी आयी थी. इसमें हत्या से लेकर हत्या का प्रयास, लूट, रेप और सामान्य मारपीट तक की घटनाएं भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि पुलिसबलों की चुनौती आने वाले दिनों में बढ़ेगी क्योंकि लॉकडाउन प्रतिबंध से बाहर आने के बाद भी कोविड प्रबंधन से जुड़ी ड्यूटी कई स्तरों पर जारी रहेगी.
साथ में रूटीन अपराधों की जांच, दबिश और अन्य कार्रवाई का दबाव भी बढ़ सकता है. पिछले दिनों डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी के साथ समीक्षा बैठक की थी. इस दौरान उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये थे. लॉकडाउन के दौरान लूट, छिनतई, हत्या, दुष्कर्म सहित विभिन्न अपराधों की दर 40 से लेकर 75 फीसदी तक कम हो गयी थी.
60% हत्याओं के पीछे जमीन कारोबार व आपसी विवाद का मामला
झारखंड में कुल होनेवाली हत्याओं में से 60% हत्या जमीन विवाद और आपसी विवाद को लेकर हो रही है. झारखंड बनने के बाद राजधानी रांची सहित राज्य के कई बड़े शहरों में जमीन की कीमत काफी बढ़ी है. जैसे-जैसे जमीन की कीमत आसमान छूने लगी, वैसे-वैसे ही इस धंधे में अपराधियों ने भी पांव पसारना शुरू कर दिया.
सफेदपोश जमीन माफियाओं ने इस धंधे में सीधे न उतर कर अपने-अपने इलाकों के कुख्यात अपराधियों को मोटी रकम देकर सपोर्ट लेना शुरू कर दिया. संपत्ति विवाद में होनेवाली कुल हत्याओं में आधे से अधिक जमीन विवाद के कारण होती हैं. इनमें जमीन कारोबारी, जमीन की दलाली करनेवाले, खरीददार और बिक्री करनेवालों के अलावा परिवार के सदस्यों द्वारा की गयी हत्यायें भी शामिल हैं. हालांकि पुलिस के अनुसार झारखंड में अधिकांश हत्याएं छोटे-छोटे विवादों की वजह से भी होती हैं.




