
Ranchi: 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने अपनी घोषणा पत्र में कई चीजों का ऐलान किया. सरकार बनने के बाद कई ऐसी घोषणाएं हैं, जो गठबंधन सरकार पूरी भी कर रही है. उन्हीं घोषणाओं में से एक था राज्य को और तीन उपराजधानी देने का मामला. सरकार बनने के बाद इसपर तेजी से काम हुआ. तय हुआ कि पलामू प्रमंडल के मेदनीनगर (पलामू), कोल्हान प्रमंडल में चाईबासा और उत्तरी छोटानागपुर में गिरिडीह को उपराजधानी बना दिया जाएगा.
सारी सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद अब यह फाइल सीएम हेमंत सोरेन की टेबल पर जाकर अटक गयी है. फरवरी से ही यह फाइल सीएमओ में पड़ी है. कोविड-19 की वजह से सरकार अभी इसपर आगे नहीं बढ़ रही है. मंत्रीपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद उपराजधानियों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जाता. अगर ऐसा होता तो, देश का झारखंड पहला राज्य होता,जहां चार उपराजधानियां होती. एक उपराजधानी पहले से ही दुमका है.
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चार उपराजधानियों के पीछे क्या था मकसद और चुनौती
हर प्रमंडल में एक उप राजधानी होने से शहरी और ग्रामीण सुविधाओं में वृद्धि होती. राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, हाईकोर्ट की बेंच और शाखा सचिवालय खुलने से आम लोगों को कई प्रकार की सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाती. उन्हें रांची आने-जाने की परेशानी से निजात मिलती. उपराजधानी बन जाने से संवैधानिक संस्थाओं के कार्यालय और मुख्यालय भी बनते.
हर उपराजधानी में एक शाखा सचिवालय बनाने की योजना है. शाखा सचिवालय बनने से योजनाओं को लागू और संचालन करने में सरकार को काफी आसानी होती. उपराजधानियां बनाने पर कई तरह की चुनौतियों का सामना भी सरकार को करना पड़ सकता है. बाबूलाल मरांडी ने झारखंड का पहला मुख्यमंत्री बनने के बाद दुमका को उपराजधानी बनाया.
लेकिन इतने सालों के बाद भी दुमका में अभी तक ना ही सीएम आवास बन पाया है और ना ही हाईकोर्ट की बेंच की सुविधा वहां शुरू हो पायी है. आस-पास के क्षेत्र भी काफी पिछड़ा हुआ है. ऐसे में चार उपराजधानी बनाने के बाद कहीं दुमका जैसा हाल बाकी राजधानियों का ना हो जाये, यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है.
गिरिडीह पर क्यों है सरकार का ध्यान
उत्तरी छोटानागपुर में ऐसे तीन शहर हैं, जो उपराजधानी का दावा करते हैं. हजारीबाग, धनबाद और गिरिडीह. सबसे पिछली पायदान पर बोकारो का नाम भी शामिल है. लेकिन इन सभी जिलों में गिरिडीह एक ऐसा जिला है, जो काफी पिछड़ा होने के साथ काफी बड़ा है.
भौगोलिक दृष्टिकोण से यह जिला प्रमंडल के मध्य में भी स्थित है. इसलिए सरकार इसे उपराजधानी बनाकर इस जिले का विकास करना चाहती है. राजनीतिक एंगल से भी गिरिडीह वर्तमान सरकार के लिए ज्यादा उपयुक्त है.
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