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सीएनआइ-छोटानागपुर डायसिस विवाद : बिशप के निर्णय को पलटा पादरियों ने, कहा- मेल मिलाप के लिए शुरू करें बातचीत

Ranchi : चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआइ) और ऑटोनोमस छोटानागपुर डायसिस के मामले में अब नया मोड़ आ गया है. ऑटोनोमस छोटानागपुर डायसिस के पादरियों ने बिशप बीबी बास्के के उस निर्णय को पलट दिया है जिसमें उन्होंने सीएनआइ के साथ मेल-मिलाप के लिए बातचीत को स्थगित कर दिया था. बुधवार को बहु-बाजार स्थित डायसिस कार्यालय के सभागार में बिशप और पादरियों की बैठक हुई.

इस बैठक में पादरियों ने कहा कि सीएनआइ के साथ मेल मिलाप के लिए बातचीत जल्दी ही शुरू होनी चाहिए. बुधवार की यह बैठक दिन के 11 बजे से दिन के तीन बजे तक चली. इस बैठक में यह भी कहा गया है कि सीएनआइ से जयंत अग्रवाल को सभी पदों से हटाया जाये. इसके अलावा बिशप बास्के को उनके पद पर पुन: मान्यता दी जाये और सीएनआइ से यह भी कहा गया है कि वह छोटानागपुर डायसिस पर बदले की कार्रवाई नहीं करे.

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क्या है मामला

1970 में उत्तर भारत के विभिन्न चर्च समूह एक बैनर (चर्च ऑफ नार्थ इंडिया) के तले आये. इसमें एंग्लिकन चर्च से संबद्ध रहा छोटानागपुर डायसिस भी एक था. इसके बाद छोटानागपुर डायसिस भी सीएनआइ के संविधानों और नियमों के तहत संचालित होने लगा. कुछ महीने पहले छोटानागपुर डायसिस के बिशप बीबी बास्के ने सीएनआइ से अलग (ऑटोनोमस) होने की घोषणा कर दी.

इसके जवाब में सीएनआइ ने बिशप बास्के से उनकी पदवी को छीन ली और अपना एक प्रतिनिधि वहां नियुक्त कर दिया. हालांकि डायसिस में नियंत्रण बिशप बास्के और उनके समर्थकों का ही रहा.

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