GarhwaJharkhand

गढ़वा: घंटाघर निर्माण का विरोध करना झामुमो नेता को पड़ा भारी, 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित

Garhwa : गढ़वा जिला मुख्यालय के रंगा मोड़ पर बन रहे घंटाघर निर्माण का विरोध करना झामुमो नेता उमाकांत तिवारी को काफी महंगा पड़ा. उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. इस सिलसिले में झारखंड मुक्ति मोर्चा के गढ़वा इकाई के सचिव मनोज ठाकुर ने पत्र जारी किया है.

इसे भी पढ़ें : NewsWing Impact: पाकुड़ के चंडालमारा ब्रिज के नीचे से बालू उठाव करने वाले तीन ट्रैक्टर जब्त

बताते चलें कि शनिवार को घंटाघर निर्माण के विरोध में भारतीय जनता पार्टी रंका मोड़ पर हल्ला बोल प्रदर्शन किया था. इसमें जेएमएम नेता उमाकांत तिवारी भी शामिल थे. उन्होंने प्रदर्शन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कई तरह के स्टेटमेंट दिए थे पार्टी ने इस पर संज्ञान लिया और कार्रवाई की.

झामुमो के जिला सचिव मनोज ठाकुर ने जारी किए गए प्रेस रिलीज में कहा है कि 5 जून को इंदिरा गांधी पार्क में बन रहे इंदिरा प्रियदर्शनी टावर निर्माण कार्य को पूर्व विधायक सत्येंद्र तिवारी के नेतृत्व में जबरन काम बंद कराया गया था. जिसमें उमाकांत तिवारी की भी संलिप्तता उजागर हुई.

विकास कार्य के विरुद्ध उमाकांत तिवारी ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक बातें कहीं, जो पार्टी विरोधी है. पहले भी अनेकों शिकायतें उमाकांत तिवारी के खिलाफ मिली थी. पार्टी में अनुशासन रहे, इसलिए उमाकांत तिवारी को पार्टी विरोधी इस कार्य के लिए 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है.

इधर, उमाकांत तिवारी ने इस मामले में अपनी सफाई दी और कहा कि हम स्थानीय हैं. जो हो रहा है, वो गलत है. उसका विरोधी होना चाहिए. न मैं भाजपा में हूं औऱ न रहूंगा.

इसे भी पढ़ें :भाजपा ने गवर्नर से लगायी गुहार, कहा- TAC पर सरकार के असंवैधानिक निर्णय को करें खारिज

निजी स्वार्थ के लिए घंटाघर बनवा रहे हैं मंत्री: उमाकांत

समाजसेवी सह झामुमो नेता उमाकांत तिवारी ने कहा कि इंदिरा गांधी पार्क के लिए जमीन दान करने वाले बैजनाथ तिवारी उनके पिता हैं. उन्होंने कहा कि घंटाघर अगर निर्माण हो रहा है तो उसमे इंदिरा गांधी जी की आदमकद प्रतिमा बननी चाहिए और संकट मोचन मंदिर का भी विकास होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर गढ़वा में विकास का कार्य करें जो सराहनीय है, लेकिन यह घंटाघर जो निर्माण हो रहा है. इसका हम विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि गढ़वा में और कई जगह हैं, जिनका नामकरण यहां के समाजसेवियों, स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर होना चाहिए.

Related Articles

Back to top button