
NW Desk: एफडीआई के विरोध में देश के व्यवसायियों ने भारत बंद बुलाया है. शुक्रवार को आहुत इस बंद में पहली बार अपने अधिकारों और कारोबार की सुरक्षा को लेकर सात करोड़ व्यापारी मतदाता अपना रोजगार बंद रखेंगे. अपने विरोध को दर्शाते हुए वो किसी भी प्रकार का कोई कारोबार नही करेंगें.
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व्यापारियों के संगठन कान्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वालमार्ट द्वारा घरेलू खुदरा कंपनी फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण और खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया है.
वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील का विरोध
कैट ने वालमार्ट, फ्लिपकार्ट डील का विरोध करते हुए इसे सरकार की एफडीआइ पॉलिसी का उल्लंघन बताया है. व्यवसायियों का कहना है कि इस डील से सीधे तौर पर आनेवाले समय में देश के छोटे व्यापारियों के पेट और रोजगार पर लात पड़ेगी. कैट की मांग है कि सरकार खुदरा व्यापारियों के लिए कोई ठोस रणनीति बनाए और वॉलमार्ट-अमेजन जैसी बहुराष्ट्रीय दिग्गज कंपनियों को खुदरा व्यापार में जगह न दी जाए.
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वही, दूसरी ओर देश के खुदरा व्यापार में किसी भी तरह के विदेशी निवेश की अनुमति वर्तमान परिस्थितियों में देश के घरेलू व्यापार एवं लघु उद्योग के लिए बेहद घातक सिद्ध होगी. इसके बावजूद बड़ी विदेशी कंपनियों को रिटेल बिजनेस में प्रवेश करने का मौका दिया जा रहा है. कैट की मानें तो वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट गठजोड़ देश के रिटेल बाजार में कीमतों को प्रभावित करेगा, जिससे असमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा. भारत बंद के दौरान वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे और खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के खिलाफ जंतर-मंतर पर शुक्रवार को धरना भी दिया जाएगा.




