
Ranchi: हजारीबाग में कोयले के अवैध गोरखधंधे में पुलिस-प्रशासन नाक तक डूब गया है. पुलिस प्रशासन के कनीय अफसरों को कानून का लिहाज रहा है तो सीनियर अफसरों ने अपने रूतबे और इकबाल को खत्म ही कर दिया है.
कोयले की अवैध गतिविधियां ना सिर्फ अफसरों के नाक के नीचे चल रही हैं, बल्कि उनके अफसर भी शामिल हो रहे हैं. और सीनियर अफसरों की चुप्पी उन्हें संदिग्धों की श्रेणी में ला रहा है.
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जब्त पेलोडर से कोयला लोडिंग
कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पर जब्त किये गये 36 हजार टन कोयला रेलवे के रैक पर लोड करके पावर कंपनियों को भेज दिया गया. रैक में कोयला लोड करने के लिये जिस पेलोडर का इस्तेमाल किया गया, उसे भी प्रशासन ने जब्त किया था.
एसडीओ ने 30 जनवरी 2019 को साइडिंग में छापामारी कर 03 पेलोडर भी जब्त किये थे. जब्त पेलोडर को कटकमसांडी थाना में रखा गया था. थाना से ही पेलोडर को साइडिंग पर ले जाकर 09 रैक पर कोयला लोड किया गया और फिर पेलोडर को थाना में लाकर लगा दिया गया.
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पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत !
ऐसे में यह तो तय है कि जब्त कोयला को रैक पर लोड करके बिजली कंपनियों को भेजने के अवैध कारोबार में कटकमसांडी थाना भी मिला हुआ है.
गौर करने वाली बात यह है कि डीसी की अदालत ने आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिस कमेटी को दी है, उसमें स्थानीय थाना यानी कटकमसांडी थाना के प्रभारी भी शामिल हैं.
ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि सिर्फ थाना मिला हुआ है या उसके ऊपर के अफसर भी. यहां उल्लेखनीय है कि हजारीबाग में 36 हजार टन कोयला भेजे जाने की चर्चा आम है. तो क्या जिला मुख्यालय में बैठे पुलिस-प्रशासन के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है.
अब तक क्यों नहीं हुई कार्रवाई ?
अगर पुलिस-प्रशासन के अफसरों को इसकी जानकारी है तो, अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. क्या अफसरों पर दवाब है या फिर बात कुछ और है.
क्या हजारीबाग के डीसी,एसपी यह नहीं पता कर पा रहे हैं कि अप्रैल माह में कटकमसांडी रेलवे साइडिंग से कितना टन कोयला पावर कंपनियों को भेजा गया. जबकि इसकी पूरी जानकारी www.fois.indianrail.gov.in पर उपलब्ध है.
इसके मुताबिक, कटकमसांडी रेलवे साइडिंग से 10 अप्रैल 2019 को 02 रैक, 12 अप्रैल 2019 को 02 रैक, 13 अप्रैल 2019 को 04 रैक और 24 अप्रैल 2019 को एक रैक कोयला लोड करके क्रमशः NTPC, MBPR, NTPC और DBPL कंपनी को भेजा गया.
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