
Ranchi : प्रदेश भाजपा ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के मसले पर राज्य सरकार पर कई सवाल खड़े किये. कहा कि केंद्र की मदद के बावजूद राज्य सरकार अपने स्वास्थ्य महकमे की हालत दुरुस्त नहीं कर पा रही है. प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अभी हेल्थ डिपार्टमेंट पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है. खाट पर मरीजों को अस्पतालों तक ले जाने की मजबूरी है. अस्पताल में दवाओं, डॉक्टरों की समस्या बनी हुई है. यह तब है जब केंद्र के स्तर से राज्य को भरपूर मदद मिलती रही है.
इसे भी पढ़ें : Adityapur Crime : होटल में शराब पीने से रोका तो चाकू से किया हमला, शराबी हवालात और संचालक अस्पताल में
राज्य में देश के जरूरतमंद औऱ गरीब लोगों के वास्ते पीएम मोदी ने आयुष्मान भारत सेवा योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को रांची से ही की थी. प्रति परिवार कार्डधारकों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त ईलाज की सुविधा इससे मिल रही है. अब तक 21 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट बनाये जा चुके हैं. 25 अक्टूबर 2021 को केंद्र की ओर से आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन लॉन्च किया गया. इसी तरह से अन्य कई अन्य योजनाओं के जरिये देश में स्वास्थ्य सेवाओं को बूस्ट अप करने पर काम जारी है. पर झारखंड सरकार अपनी नाकामी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं को और बदतर करने में लगी है. कॉन्फ्रेंस में मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह समेत अन्य भी मौजूद थे.
इसे भी पढ़ें : ISM धनबाद ने दिखाया कमाल, यूनिवर्सिटी रैकिंग में देश का दूसरा सर्वश्रेष्ठ संस्थान, 6 पाठ्यक्रम विश्व के शीर्ष 100 में शामिल हुए
आयुष्मान के पैसों का उपयोग नहीं
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि आयुष्मान योजना के जरिये अधिक से अधिक गरीबों को मदद मिले. सस्ती व बेहतर सेवाएं मिले. क्लेम आने से उस पैसे का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के अलावे स्वास्थ्य कर्मियों को इंसेंटिव देने में करना था. पिछले साढ़े तीन सालों में आयुष्मान से रिम्स को 9 करोड़ का क्लेम मिला. पर प्रावधानों के अनुसार न तो इसकी 75 फीसदी राशि का उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट पर हुआ और न ही हेल्थ वर्करों को एक पैसे का इंसेंटिव मिला.
इन योजनाओं से झारखंड को भी लाभ
केंद्र की ओऱ से जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं. अब तक देश में 8694 प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं. कैंसर, टीबी और अन्य बीमारियों के लिए इस सेंटर के जरिये सस्ती दवाइयां मिल रही हैं. कोरोना काल में केंद्र ने ई-संजीवनी सेवा शुरू की जिससे औसतन 1 लाख रोगियों को हर दिन इलाज मुहैया कराया जा रहा है. आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत हुई है. एम्स की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है. मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 48 फीसदी की बढ़ोतरी पिछले 7 सालों में की गयी है. कोरोना महामारी के खिलाफ हेल्थ इंश्योरेंस सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध करायी गयीं. इसके विपरीत राज्य सरकार के स्तर से स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीरता नहीं दिखायी गयी है.
इसे भी पढ़ें : World Health Day: ऋचा चड्ढा से लेकर इमरान हाशमी तक, सान्या मल्होत्रा भी गुजरी है फिटनेस परिवर्तन से, ये रही पूरी जानकारी




