नागपुर : मुंबई में 12 मार्च, 1993 को हुए बम विस्फोटों के लिए दोषी ठहराए गए याकूब मेमन को 30 जुलाई को फांसी दी जाएगी। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि राष्ट्रपति ने अप्रैल महीने में उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसे फांसी दी जानी है। उसे नागपुर केंद्रीय कारा में फांसी दी जाएगी, जहां इस समय उसे रखा गया है।
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट मेनन (53) ने सर्वोच्च न्यायालय में दूसरी बार पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिसकी सुनवाई 21 जुलाई को हो सकती है। लेकिन राज्य सरकार सप्ताह की शुरुआत में जारी वारंट के बाद से ही उसे फांसी दिए जाने की तैयारी कर रही है।
मेनन (53) को मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने 27 जुलाई 2007 में दोषी ठहराया था। उस पर मुंबई में 13 सिलसिलेवार बम विस्फोटों को अंजाम देने वालों को वित्तीय सहायता मुहैया कराने सहित कई आरोप साबित हुए थे। 12 मार्च 1993 को किए गए विस्फोटों में 257 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 700 से अधिक घायल हुए थे।
मेनन ने निचली अदालत के फैसले को बम्बई उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन यहां भी उसे निराशा हाथ लगी। बाद में उसने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। यहां से उसे राहत नहीं मिली, जिसके बाद उसने न्यायालय में दूसरी बार पुनर्विचार याचिका दायर की है। वह मामले के मुख्य अभियुक्त टाइगर मेनन का भाई है, जो फिलहाल फरार है।
मामले में बचाव पक्ष के पूर्व वकील और आपराधिक मामलों के वरिष्ठ वकील माजिद मेनन ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई दूसरी पुनर्विचार याचिका पर फैसला आने से पहले ही मामले में राज्य सरकार की ओर से की जा रही जल्दबाजी पर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शीर्ष नेता और राज्यसभा सांसद माजिद ने बुधवार को आईएएनएस से कहा, “क्या वे (राज्य सरकार) मामले पर पूर्व कार्रवाई कर रहे हैं या उन्हें पहले से ही पुनर्विचार याचिका पर आने वाले फैसले के बारे में जानकारी है। उन्हें मामले पर अंतिम फैसला आने तक इंतजार करना चाहिए।”




