
Ranchi: झारखंड के विधायक अब डायरेक्ट मिनीरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की राशि विकास कार्यों पर खर्च कर सकेंगे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में बजट सत्र के आखिरी दिन समापन भाषण के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा कि विधायकों को इसकी स्वतंत्रता दी जा रही है.
डीएमएफटी वह फंड है, जो विभिन्न विभाग रॉयल्टी के रूप में खनन विभाग को देता है. रॉयल्टी के इन्हीं पैसे से जिला प्रशासन खनन प्रभावित क्षेत्र में खर्च करते हैं. डीएमएफटी के पैसों को खर्च करने का अधिकार अब तक विधायकों के पास नहीं था. जिस कारण जनप्रतिनिधि इस पैसे का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए नहीं कर पाते थे.
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क्या है डीएमएफटी
जिला खनिज फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी निकाय के रूप में स्थापित ट्रस्ट है, जो खनन कार्यों से प्रभावित जिलों में, खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों के हित और लाभ के लिए काम करता है.यह जिले में प्रमुख या मामूली खनिज रियायत के धारक के योगदान के माध्यम से वित्त पोषित है जैसा कि केंद्र या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है.
डीएमएफटी का 70 प्रतिशत का पैसा नहीं हो पाता खर्च
झारखंड में डीएमएफटी फंड का 70 प्रतिशत पैसा खर्च नहीं हो पाता है. झारखंड के विभिन्न जिलों में 100 करोड़ से अधिक के डीएमएफटी खाते में ही पड़े हैं. सही से योजना नहीं बनने और क्रियान्वयन नहीं होने के कारण पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है. माना जा रहा है कि अब विधायकों को जन कल्याण के लिए खर्च करने की छूट मिलते ही इसका इस्तेमाल हो सकेगा.
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चाईबासा विधायक ने बताया कि सिर्फ उनके जिला में डीएमएफटी फंड से करीब 800 करोड़ रुपये आते हैं. इसमें सबसे बड़ा योगदान सेल प्रबंधन का है, लेकिन दुख की बात यह है कि खदान प्रभावित लोगों को इस फंड के माध्यम से बेहतर शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल समेत तमाम बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. उन्होंने कहा कि अब ऐसा नहीं चलेगा. अब खदान प्रभावितों को उनका हक- हकूक का अधिकार देना ही पड़ेगा.




