
Pravin Kumar
Ranchi: भगवान बिरसा मुंडा की 120 वीं शहादत दिवस पर आज (9 जून को) पूरा राज्य उन्हें नमन कर रहा है. लेकिन नमन करने वाले में वैसे लोग भी हैं जिसने शहीद के गांव को राजनीतिक रोटी सेंकने का औजार बनाया. रघुवर दास ने मुख्यमंत्री रहते हुए शहीद के गावं के लिय बड़ी-बड़ी घोषणा की थी. लेकिन ये घोषणाओं तक ही सीमित रह गयी.
अमर शहीद बिरसा मुंडा के गांव के कच्चे और खपड़े के मकान आज भी रघुवर दास और देश के गृह मंत्री अमित शाह को मुहं चिढ़ा रहे हैं. पूर्व सीएम ने शहीद बिरसा मुंडा के गांव के लोगों को छला है. शहीदों के नाम पर राजनीतिक की है. विकास के खोखले वादों से शहीद के गांव वाले को ठगने का काम किया है.
Birsa Munda – Hero who fought and died for the rights of Janjatis: https://t.co/1CrjwN53sC via @eOrganiser
— Raghubar Das (@dasraghubar) June 9, 2020
दो साल से पेयजल के लिये पूर्व सरकार के समय से लगायी गयी पानी की टंकी खराब होने के कारण बंद पड़ी है. पूर्व सरकार के शासन में पानी की व्यवस्था सही रूप से गांव में नहीं हो सकी. आज आप बिरसा मुंडा को नमन कर रहे हैं, लेकिन यह अधिकार आपने खो दिया है. इतना ही नहीं पूर्व सरकार ने बिरसा उलगुलान के बाद सीएनटी कानून बना उसे भी बदलने का प्रयास किया था.
इसे भी पढ़ेंःपलामू: होम क्वारेंटाइन में युवक की मौत, सर्दी-बुखार से था पीड़ित, कोविड रिपोर्ट आयी निगेटिव
2017 में अमित शाह ने किया था भूमिपूजन, आज तक नहीं पूरे हुए एक भी घर
17 सितंबर 2017 को रांची से लेकर खूंटी के उलिहातू तक भगवा लहरा रहा था. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू पहुंचे थे. वहां उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा के आंगन में शहीद ग्राम विकास अंतर्गत आवास योजना के लिए भूमि पूजन किया था. करीब तीन साल बाद भी यहां अबतक एक घर का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. रोजगार की तलाश में उलिहातू के कई युवा पलायन कर चुके हैं.
आज भी अपनी बदहाली पर रो रहा है शहीद बिरसा का गांव
शहीदों के गांव के नाम पर राजनीति करने वाले रघुवर सरकार ने बिरसा मुंडा के गांव के विकास के नाम पर खोखले दावे किये. लेकिन परिस्थिति अब भी नहीं बदली है. गांव में विकास के काम के नाम पर कुछ काम जरूर हुए हैं जिनमें किताहातु से उलिहातू तक चकाचक सड़क बनी है, ताकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गांव जाकर आवास योजना के लिए भूमिपूजन कर सके.
स्वास्थ्य उपकेन्द्र का निर्माण किया गया है. लेकिन उसमें एक भी प्रसव आज तक नहीं हुआ. पेयजल के लिये गांव के दो टोलों में पानी टंकी का निर्माण किया गया है. भाजपा सरकार की मौजूदगी में दो साल से खराब होकर ये बंद पड़ी है. साथ ही गांव की मुख्य सड़क के किनारे रंग-बिरंगी ईंटें लगायी गयी हैं. गांव में शौचालय का निर्माण किया गया है, लेकिन पानी के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो पाया और टूट के बेकार हो गये. आवास योजना के तहत कुछ घरों का निर्माण हाल के समय से शुरू हुआ है, लेकिन एक भी पूरा नहीं हुआ है.
अब मीडिया से बात करने में रूचि नहीं रखते यहां के लोग
उलिहातू भगवान बिरसा के जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है. झारखंड गठन के पहले से ही इस गांव के विकास की बात सरकारें करती रही हैं, लेकिन कई सरकार आयी और गयी. यहां विकास के दावे खोखले ही सबित हुए. बता दें कि उलिहातू चार टोले में बंटा गांव है, जिसमें पीड़ीटोला, इंचाडीह, बोकोलडीह और गामाडीह टोले हैं. गांव के चारों टोले में लगभग 200 मुंडा परिवार के पूर्ती गोत्र के लोग रहते हैं. उलिहातू के ग्रामीण अब मीडिया से बात करने में रूचि नहीं रखते इसके पीछे उनकी पीड़ा और विकास के खोखले दावे की प्रताड़ना स्पष्ट दिखायी देती है.
इसे भी पढ़ेंःसिसोदिया ने चेतावनी दी- दिल्ली में 31 जुलाई तक साढ़े पांच लाख से अधिक मामले हो सकते हैं
परंपरागत पेयजल स्रोत से ही अपनी जरुरतों को पूरा करते हैं लोग
गांव के युवा किनू नाग और नेलशन पूर्ती बताते है दो साल से पानी टंकी बंद पड़ी है. इसे चालू नहीं किया जा सका है. गांव के दो टोलों में पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन शुरू हुई थी. इचाडीह और बोकोलडीह टोला में पानी की टंकी लगी हुई है.
लेकिन अब गांव के पीड़ी टोला और गामाडीह के लोग भी आज परंपरागत पेयजल के स्रोत से ही अपनी पेयजल की जरूरतों को पूरा करते हैं. हैंड पंप लगा जरूर है लेकिन वह खराब हो जाता है और गर्मियों में तो सूख ही जाता है. ग्रामीण बताते हैं कि गर्मी में पानी दूर से लाकर घर की जरूरतों को पूरा कर पाते हैं.
वन उपज पर निर्भर ग्रामीण आजीविका
गांव के लोगों की आजीविका खेती और वन उपज पर निर्भर है. साथ ही पशुपालन करके भी यहां के लोग अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं. खेती के लिए सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण एक फसली खेती होती है. गांव में रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में अपने बलबूते अपनी अजीविका चलाते हैं शहीद के गांव वाले. वर्तमान समय में अमित शाह के दौरे से पहले से ही यहां कुछ परिवार बकरी पालन कर सकें इसलिए शेड निर्माण कराया गया है.
घोषणाओं का गांव बनकर रह गया उलिहातू
गांव के बुर्जुग याद करते हुए बताते हैं कि, लालू यादव जब मुख्यमंत्री थे तब गांव आये थे. तब उन्होंने घोषणा की थी कि गांव के खपड़ के घर और झोपड़ी को उजाड़ दो, इसकी जगह पर सभी को पक्का मकान मिलेगा. लेकिन सरकार द्वारा बनाये गये भवन को छोड़कर आज भी गांव में सभी निजी घर खपड़े के ही है. लालू यादव की घोषणा भी हवा में ही रह गयी.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने भी उलिहातू में कई घोषणा की थी जो आज तक पूरा नहीं हुई. राजनाथ सिंह भी शहीदों के गांव के विकास की बात कर गये थे. उलिहातू में अब अमित शाह और रघुवर सरकार ने घोषणाओं का अंबार लगाया. जो झूठ का पुलिंदा बन कर रह गया.
क्या थी रघुवर सरकार की शहीदों के गांवों की आवास योजना
यह कल्याण विभाग की योजना है, जिसमें राज्य के शहीदों के गांवों में आवास बनाकर दिये जाने की बात थी. योजना के मुताबिक, कल्याण विभाग की तरफ से झारखंड के आठ शहीदों के गांव के लिए शहीदों के नाम पर आवास योजना की शुरुआत की गयी, जिसमें सबसे पहला नाम उलिहातू का है. योजना की शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उलिहातू से की थी.
योजना के मुताबिक, 8*9 फीट के दो कमरे, 6*6.6 फीट का एक किचन, 7*6.6 फीट का एक बरामदा, 4*4 का बाथरूम और 4*3 फीट का शौचालय वाला एक मॉडल मकान बनाकर दिया जाना था. कल्याण विभाग की तरफ से इस योजना के तहत उलिहातू में 136 आवास बनने थे. इन आवासों को गांववालों के बीच बांटना था. जो पूरा नहीं हो सका.
इसे भी पढ़ेंःCorona Update: संक्रमण से राज्य में आठवीं मौत, फुसरो की महिला का रिम्स के कोविड वार्ड में निधन




