
New Delhi: भ्रष्टाचार के मामले में भारत की स्थिति पिछले साल से थोड़ी सुधरी है. दुनिया के भ्रष्ट देशों की लिस्ट में भारत तीन पायदान ऊपर आया है. 180 देशों की इस सूची में भारत तीन स्थान के सुधार के साथ 78वें पायदान पर पहुंच गया है. जबकि रूस, चीन और पाकिस्तान समेत 102 देशों में ज्यादा भ्रष्टाचार है. दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश सोमालिया को बताया गया है. जबकि डेनमार्क सबसे बेहतर है.भ्रष्टाचार-निरोधक संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक, 2018 जारी किया है.
41 अंक के साथ भारत 78वें पायदान पर
गैर लाभकारी एनजीओ ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 2018 की करप्शन परसेप्सन इंडेक्स रिपोर्ट जारी की है. इस सूची में दुनिया के 180 देशों के नाम है. पहले पायदान पर डेनमार्क है. जबकि भारत, अर्जेंटीना, आइवरी कोस्ट और गुयाना जैसे देशों की स्थिति पहले से बेहतर हुई है. 2018 की रिपोर्ट में भारत को 41 अंक के साथ 78वें पायदान पर रखा गया है. 2017 के इंडेक्स में भारत के 40 अंक थे और देश 81वें नबंर पर था. यानी एक साल के अंदर भारत में भ्रष्टाचार कम हुआ है. बीते 10 सालों में यह पहला मौका है जब भारत इस जगह पहुंचा है.हालांकि 2008 से लेकर अब तक भारत का प्रदर्शन धीमे धीमे, लेकिन बेहतर हुआ है.
चीन और पाकिस्तान की हालत खराब
भ्रष्टाचार के मामले में भारत की रैंकिंग में जहां सुधार है, वहीं पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की स्थिति काफी खराब है. इस सूची में चीन 87वें पायदान पर है. जबकि पिछले साल चीन 79वें नंबर पर था. और पाकिस्तान 117वें स्थान पर है. यानी पड़ोसी देश पाकिस्तान में भ्रष्टाचार को लेकर स्थिति बहुत ज्यादा खराब है.
सोमालिया सबसे भ्रष्ट, डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की वार्षिक रिपोर्ट में बीते काफी समय से डेनमार्क और न्यूजीलैंड सबसे कम भ्रष्ट देशों की सूची में सबसे ऊपर बने हुए हैं. 2018 भी इसका अपवाद नहीं. 88 अंकों के साथ डेनमार्क पहले स्थान पर है और 87 अंकों वाला न्यूजीलैंड दूसरे नंबर पर. उसके बाद फिनलैंड, सिंगापुर, स्वीडन, स्विट्जरलैंड नॉर्वे, नीदरलैंड्स, कनाडा, लक्जमबर्ग, जर्मनी और ब्रिटेन भी इसी क्रम में टॉप 10 में शामिल हैं. डोनाल्ड ट्रंप के राज में अमेरिका की स्थिति भी खराब हुई है. इस साल अमेरिका को 71 प्वाइंट मिले हैं और वह टॉप 20 देशों से बाहर हो गया है. इस साल अमेरिका की रैंक 22 है, जो पहले 18 थी. इस वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में करीब दो-तिहाई से अधिक देशों को 50 से कम अंक मिले हैं. हालांकि देशों का औसत प्राप्तांक 43 रहा है.
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