
Akshay Kumar Jha
Ranchi: रघुवर सरकार जैसी शराब नीति को एक बार फिर से हेमंत सरकार दोहराने वाली है. इसके लिए अधिकारियों का जत्था छत्तीसगढ़ की शराब नीति का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है. अगर नीति को लागू किया जाता है तो एक बार फिर से शराब के थोक और खुदरा व्यापार पर सरकार का नियंत्रण होगा. जेएसबीसीएल (झारखंड स्टेट बिवरेज क़ॉरपोरेशन लिमिटेड) एक बार फिर से सक्रिय होगा. फिलहाल थोक और खुदरा दोनों शराब कारोबार निजी हाथों में है और सरकार को इस नीति से उतना मुनाफा नहीं हुआ, जिसका आंकलन उत्पाद विभाग की तरफ से किया गया था. साथ ही पुख्ता सूत्रों का कहना है कि थोक और खुदरा शराब कारोबार पर जिस मिहीजाम और जामताड़ा के सिंडीकेट का कब्जा है, उसे कारोबार से बाहर करने की नीति पर भी सरकार काम कर रही है.
सिंडीकेट से सरकार के खजाने को घाटा
हेमंत सरकार की तरफ से थोक शराब नीति में बदलाव किया गया. 25 लाख रुपए का ननरिफनडेबल शुल्क लेकर थोक शराब नीति में हिस्सा लेने के लिए कारोबारियों को बुलाया गया. इतनी बड़ी रकम होने की वजह से कुछ ही शराब कारोबारी शामिल हो पाए. लिहाजा एक तय निती की तहत मिहीजाम और जामताड़ा का एक सिंडीकेट ने पूरे कारोबार पर कब्जा कर लिया. साथ ही सरकार पर यह आरोप लगा कि कारोबार के टैक्स नीति में बिना राजस्व पर्षद के सहमति के ही बदलाव किया. जो कि नियमसंगत नहीं है. इसकी शिकायत बीजेपी की तरफ से राज्यपाल से की गयी. पुख्ता सूत्रों को कहना है कि सरकार के खजाने पर इस निती का प्रतिकूल प्रभाव तो पड़ा ही, साथ ही सरकार के कुछ नजदीकियों के उम्मीदों पर भी पानी फिरा. जो करार सिंडीकेट की तरफ से किया गया था, वो पूरा नहीं हो सका. लिहाजा अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है.
ऐसे पुख्ता होती है सिंडीकेट के कब्जे वाली बात
शराब थोक कारोबार में ज्यादातर कारोबारियों ने जो बैंक डिटेल्स डिपार्टमेंट को दिये हैं, वो संथाल परगना के बैंकों के हैं. झारखंड में 24 जिले हैं. इनमें से 19 जिलों में शराब के थोक व्यापार का जिम्मा गोड्डा, जामताड़ा और दुमका के कारोबारियों को मिला है. बाकी पांच जिलों में धनबाद और रांची से जुड़े व्यवसायियों को यह जिम्मा मिला है, लेकिन सभी 24 जिलों में काम करने वाले कारोबारियों का रिश्ता संथाल परगना से ही है. इस बात का खुलासा कारोबारियों की तरफ से दिया गया बैंक अकाउंट डिटेल्स कर रहा है. सभी कारोबारियों का बैंक एड्रेस संथाल का ही है. इनमें भी ज्यादातर कारोबारियों के बैंक का पता मिहिजाम का है. यानी कारोबारी का पता कहीं का भी हो, लेकिन बैंक डिटेल्स का पता संथाल परगना का ही है.




