
Jawed Islam
बरही के कांग्रेसी विधायक मनोज कुमार यादव के कथित दल बदल के कयास को लेकर पिछले कुछ समय से यहाँ चर्चा बहुत गर्म है. बरही विधानसभा क्षेत्र का कमोबेश हर व्यक्ति जो राजनीति में थोड़ी बहुत भी रूचि रखता है, उसे इस बात की बड़ी जिज्ञासा है कि क्या मनोज जी सच में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले हैं? हर चौक चौराहे पर, चाय दुकान, पान दुकान में मिलने-जुलने वाले यही पूछते रहे हैं.
सब के मन की यह जिज्ञासा, जिसने इस चर्चा को सरगर्म बना दिया है. बरही विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के जेहन में यह सवाल शिद्दत से कुलबुला रहा है और हर आदमी एक दूसरे से यह दरियाफ्त करने की कोशिश में है कि क्या वाकई मनोज जी इस बार बरही से भाजपा की टिकट पर उम्मीदवार होंगे?
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शुक्रवार को कांग्रेस के हजारीबाग कार्यालय में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई. कांग्रेस के उत्तरी छोटानागपुर प्रभारी, विधायक इरफ़ान अंसारी बैठक लेने पहुंचे थे. पर इस बैठक से मनोज यादव की अनुपस्थिति ने बरही क्षेत्र में जारी चर्चा ने आग में घी का काम किया. इस बात से लोग यही निष्कर्ष निकाल रहे हैं, उनका कांग्रेस छोड़ना व भाजपा में जाना लगभग तय है. इस चर्चा को हवा देने में कुछ भाजपेयी नेता भी लगे हुए हैं.
ये लोग तो यह तक दावा कर रहे हैं कि भाजपा में उनका टिकट फाइनल हो चुका है. इस दावे में हो सकता है सच्चाई कम हो और स्थानीय भाजपाईयों की कोई कुटील चुनावी चाल हो!
दूसरी तरफ बहुत से लोगों को दल बदल की बात पर भरोसा नहीं हो रहा है. मनोज यादव का कांग्रेस के साथ लंबा इतिहास है. पिछले कई टर्म से वे बरही से कांग्रेस के विधायक हैं. क्षेत्र में उनकी पकड़ आज भी मजबूत है. उनका अधिकांश जनाधर एंटी बीजेपी है.
इसलिए मनोज यादव का भाजपा में जाने का इमकान कम दिखता है. यहां उनका चुनावी मुकाबला भाजपा से ही होता रहा है. इस बार भी भाजपा से ही मुक़ाबला होना है. भाजपा का उम्मीदवार कौन होगा, यह अभी दिख नहीं रहा है. भाजपा टिकट के कई दावेदार हैं और सब आपस में गुत्थम-गुत्थी में हैं.
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पिछली बार भाजपा विधायक अकेला यादव को हराया था. हालांकि चुनाव जीतने के बाद से उनका अकेला यादव गुट को छोड़कर बाकी भाजपाईयों के साथ मधुर सम्बन्ध रहा है. आज भी है. और यह बात भी आम लोगों को उलझन में डालने में मददगार ही साबित हुआ है. हालाँकि इसमें मनोज जी का कूटनीतिक कौशल छुपा हुआ हो सकता है.
भाजपाईयों से नजदीकी बनाकर के वे अपने एक मजबूत विपक्ष भाजपा की धार को कुंद करने में सफल रहे हैं. कोई बता सकता है कि पिछले पांच साल में भाजपा ने मनोज यादव के विरुद्ध विपक्ष का धर्म निभाने का कोई काम किया हो?
इस सब के बावजूद, अभी यह कहा नहीं जा सकता कि जारी इस चर्चा – कयास का अंतिम निष्कर्ष किस रूप में निकलेगा. मगर यह तय है कि चौक-चौराहे पर जारी इस चर्चा ने बरही विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश आम मतदाताओं को एक भ्रम की स्थिति में डाल रखा है.
अल्पसंख्यक मतदाताओं में भी भ्रम है. इस भ्रम के निवारण के लिए मनोज यादव भी कुछ करते नज़र नहीं आ रहे हैं. बल्कि उनकी एक प्रकार की रहस्यमयी चुप्पी भ्रम को और भी गहरा बना रहा है.
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(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये इनके निजी विचार हैं. यह लेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है.)




