JharkhandMain SliderRanchi

बकोरिया कांड: मृतक के परिजन CM से मिले, कहा- जांच को लटका रही CBI, हमें ही करती है परेशान

Ranchi: जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुई कथित पुलिस और नक्सली मुठभेड़ में मारे गए उदय यादव के परिजनों ने गुरुवार को कांके रोड स्थित सीएम आवास में सीएम मुख्यमंत्री से मुलाकात की. परिजनों ने सीएम से कहा कि सीबीआइ ठीक से जांच नहीं कर रही है. साथ ही हमें बार-बार बुलाकर परेशान किया जा रहा है.

उदय यादव के परिजनों ने सीएम से उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है. उन्होंने अस संबंध में सीएम को आवेदन भी सौंपा है. वहीं इस मुलाकात के बाद उदय के परिजनों ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन ने उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है और कहा है कि वह इस मामले को विधानसभा में उठायेंगे. 

डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी सीबीआइ ने नहीं सौंपा रिपोर्ट

बकोरिया कांड में मारे गये उदय यादव के परिजनों ने सीएम को दिये आवेदन में कहा है कि कोर्ट के द्वारा पारित आदेश को लगभग डेढ़ साल बीत गये हैं, लेकिन सीबीआइ ने अभी तक जांच की कोई प्रगति रिपोर्ट न तो हाइकोर्ट में दी है और नही नीचले कोर्ट को सौंपा है.

advt

अब तक सीबीआइ पांच जांच पदाधिकारी बदले जा चुके हैं. लेकिन अभी तक घटना से संबंधित किसी भी अभियुक्त से पूछताछ नहीं की जा रही है. जांच को सीबीआइ लटका रही है और हमें परेशान कर रही है. 

न्याय नहीं मिलने के बाद हाइकोर्ट में दायर की गयी याचिका

बकोरिया कांड में मारे गये उदय यादव के परिजनों ने कहा कि हम न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री, माननीय राज्यपाल और तत्कालीन डीजीपी को लिखित रूप से कई बार गुहार लगायी, लेकिन कहीं से भी न्याय नहीं मिला.

इसे भी पढ़ें- #Save_Constitution_Rally में  बोले राहुल,  पीएम मोदी गोडसे के विचारों को मानते हैं, पर कहने की हिम्मत नहीं

adv

जिसके बाद हमने वर्ष 2016 में झारखंड हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर किया. हाइकोर्ट ने घटना से संबंधित सदर सतबरवा थाना कांड संख्या 349/2015 को सरकार की सारी दलीलों को खारिज करते हुए इस कांड को सीबीआइ को सुपुर्द कर दिया था. साथ ही आदेश दिया था कि घटना के संबंध में जल्द से जल्द जांच पूरा कर कोर्ट को प्रगति रिपोर्ट सौंपे.

पुलिस के खिलाफ सीबीआइ को मिले हैं कई साक्ष्य

जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुई कथित पुलिस और नक्सली मुठभेड़ की जांच सीबीआइ के द्वारा तेज कर दी गयी है. बकोरिया कांड की जांच कर रही सीबीआइ जल्द ही सच सामने लाने वाली है.

3 जुलाई 2019 को सीबीआइ सेंट्रल फॉरेंसिक लैब के डायरेक्टर एनबी वर्धन और सीबीआइ के बड़े अधिकारी पलामू पहुंचे थे और सीबीआइ की टीम ने घटना का डेमो किया था. उन्होंने सीन रिक्रिएट किया था ताकि घटना के हर एक पहलुओं को समझ सकें.

सीबीआइ और सेंट्रल फॉरेंसिक लैब को जांच के क्रम में कई साक्ष्य पुलिस जांच को गलत ठहराने वाले मिले हैं. बीते वर्ष 3 जुलाई को सीबीआइ सेंट्रल फॉरेंसिक लैब के डायरेक्टर एनबी वर्धन और सीबीआइ के बड़े अधिकारी पलामू पहुंचे थे और सीबीआइ की टीम ने घटना का डेमो किया था. बहुत हद तक सीबीआइ को इस कांड के अनुसंधान में सफलता हाथ लगी है.

पुलिस जांच को गलत ठहराने के लिए कई सबूत

जांच के दौरान इस कांड से जुड़े पुलिस अफसरों से सीबीआइ पूछताछ भी कर रही थी. सीबीआइ और एफएसएल टीम को नाट्य रूपांतरण के दौरान ही कई ऐसी बातें सामने मिली, जो पुलिस की जांच को गलत ठहराने के लिए काफी हैं.

पुलिस ने अपनी जांच में बताया है कि एक स्कार्पिओ गाड़ी से 12 नक्सली आ रहे थे. जो पुलिस को देखते ही गोलियां चलाने लगे. एफएसएल विंग के सदस्याें ने पाया कि स्कार्पिओ में 12 लोगाें के बैठने के बाद बंदूक से पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करना संभव नहीं हैं.

इसे भी पढ़ें- मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक जारी रह सकती है अग्रिम जमानत: सुप्रीम कोर्ट

स्कार्पिओ के अंदर किसी भी सीट पर बंदूक जैसे बड़े हथियार का मूवमेंट संभव नहीं है. 12 लोगों के बैठने के बाद स्कार्पिओ गाड़ी में हाथ-पैर हिलाने में भी परेशानी होगी, ऐसे में अंधाधुंध फायरिंग की बात कहीं से सही प्रतीत नहीं होती. बकोरियां कांड में मारे गये सभी 12 लोगों को गोली कमर के ऊपर लगी थी.

अपने बयान से मुकर गया था प्राथमिकी दर्ज करनेवाला पुलिस अफसर मो. रुस्तम

बकोरिया कांड की जांच कर रही सीबीआइ टीम के सामने घटना की प्राथमिकी दर्ज करनेवाला पुलिस अफसर मो रुस्तम ही अपने बयान से पलट गया था. मो रुस्तम ने अपने बयान में दारोगा हरीश पाठक के बयान का समर्थन किया था. साथ ही कहा था कि उसे सीनियर अफसरों ने लिखी हुई प्राथमिकी दी थी, जिस पर उसने सिर्फ हस्ताक्षर किया था.

उल्लेखनीय है कि घटना के बाद पुलिस अफसरों ने उस वक्त के थानेदार हरीश पाठक पर प्राथमिकी दर्ज करने का दबाव बनाया था. हरीश पाठक द्वारा फर्जी मुठभेड़ की प्राथमिकी दर्ज करने से इंकार करने पर सीनियर अफसरों ने इंस्पेक्टर मो. रुस्तम से प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

बकोरिया कांड में हाइकोर्ट के फैसले से मृतकों के परिजनों को न्याय की उम्मीद जगी थी. फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआइ कर रही है. मृतकों के परिजनों का कहना है कि मुठभेड़ फर्जी था और इसकी जांच होनी चाहिए.

झारखंड हाइकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने दर्ज की थी प्राथमिकी

पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र बकोरिया में आठ जून 2015 को हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के मामले में सीबीआइ दिल्ली ने प्राथमिकी दर्ज की थी. यह प्राथमिकी झारखंड हाइकोर्ट के 22 अक्टूबर 2018 को दिए आदेश पर दर्ज की गयी थी. इस घटना में पुलिस ने 12 लोगों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था.

इसे भी पढ़ें- #Budget2020: एक फरवरी को पेश होगा बजट, 31 जनवरी को आयेगा आर्थिक सर्वे

मृतकों के परिजनों ने की थी सीबीआइ जांच की मांग

मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाइकोर्ट में सीआइडी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ जांच की मांग की थी. सीबीआइ ने पलामू के सदर थाना कांड संख्या 349/2015, दिनांक 09 जून 2015 के केस को टेकओवर करते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी.

मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाइकोर्ट में सीआइडी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ जांच की मांग की थी. जिसके बाद अब पूरे मामले की जांच सीबीआइ कर रही है.

इस केस के शिकायतकर्ता तत्कालीन सतबरवा ओपी प्रभारी मोहम्मद रुस्तम हैं. उन्होंने लातेहार के मनिका थाना क्षेत्र के उदय यादव, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के निमाकातू निवासी एजाज अहमद, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के मझिगांव निवासी योगेश यादव व नौ अज्ञात मृतक और एक अज्ञात नक्सली के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. हाइकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि वादी सहित पुलिस के अधिकारी हरीश पाठक ने भी पूरी जांच पर सवाल खड़े किये.

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button