
Manoj Mishra
Dhanbad: देश में स्किल इंडिया का दौर चल रहा है. तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास पर खुद पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष जोर है. फिर भी झारखंड राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेज कई पाठ्यक्रमों से कोसों दूर हैं.
रोजगार की अच्छे अवसरों के बावजूद यहां पारंपरिक कोर्स ही संचालित हैं. नतीजन, बीटेक पास आधे छात्रों को भी नौकरी नहीं मिल रही.
झारखंड राज्य के 16 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 6,870 सीटें हैं, जिसमें से मुश्किल से आधी भी नहीं भर पाती और 20 फीसद को भी नौकरी नहीं मिलती.
जबकि दक्षिण भारत और अन्य प्रदेशों में वक्त और जरूरत के अनुसार नए कोर्स संचालित हैं. इससे वहां के विद्यार्थियों को फायदा मिल रहा है.
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झारखंड के पायोनिर इंजीनियरिंग कॉलेज बीआइटी सिंदरी के भैतिकी विभागाध्यक्ष व प्लेसमेंट एंड ट्रेनिंग इंचार्ज डॉ. घनश्याम कहते हैं कि साल 2018 में स्टूडेंट्स का रुझान नौकरी दिलाने वाले न्यू एज कोर्सों की तरफ ज्यादा देखा गया.
एआइ, एमएल, डीएल, क्लॉउड, डाटा साइंस, डाटा एनालैटिक्स, एआर, बीआर, ब्लॉक चेन, 3डी प्रीटिंग और डिजिटल मार्केटिंग की विशेषज्ञता दिलाने वाले कोर्स साल 2018 में टॉप पर रहे.
हालांकि यह केवल साल 2018 की बात नहीं है. साल 2019 और इसके अगले साल भी इनका क्रेज बने रहने की उम्मीद है.
डॉ. घनश्याम कहते हैं कि जिन कुछ करियर को लेकर छात्र टेंशन लेते हैं, उनमें से 70 फीसद में तो 5-6 साल बाद स्कोप ही नहीं रहेगा. ऑटोमेशन और आर्टिफिशल एज में जॉब इंडस्ट्री बदलेगी और कुछ ही सालों में 60 प्रतिशत करियर नये होंगे.
वहीं बीआइटी माइंनिंग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल रहमान अंसारी कहते हैं कि वर्ष 2018 में अगर किसी जॉब स्किल की सबसे ज्यादा चर्चा रही.
तो वो हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ). मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सॉफ्टवेयर कंपनियों, ई-कॉमर्स कंपनियों, मोबाइल कंपनियों और मेडिकल डायग्नोसिस आदि के क्षेत्र में, हर ओर इस स्किल के जानकारों की मांग देखी गई.
एक रिपोर्ट की मानें तो अमेजन, एपल, फेसबुक और गूगल जैसी शीर्ष कंपनियों में एआइ इंजीनियर्स को सालाना 70-75 लाख रुपये तक के भारी- भरकम पैकेज ऑफर हुए. नैस्कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में एआइ और एमएल में करीब 5 लाख नौकरियां सामने आईं.
रोजगार उन्मुख कोर्सेज में झारखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज पिछड़े
बीआइटी सिंदरी के इंजीनियरिंग प्राध्यापकों की मानें तो झारखंड राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेज कई कोर्सेज के मामलों में केरल, तमिलनाडु, सीमांध्र और कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा के विभिन्न कॉलेज से पिछड़े हैं.
दक्षिण भारतीय प्रदेशों में कई इंजीनियरिंग कोर्स हैं जिनमें डिग्री लेकर विद्यार्थियों ने सरकारी नौकरी के अलावा खुद का उद्यम स्थापित किये हैं.
राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के कई इंजीनियरिंग कोर्स भी रोजगारोन्मुखी हैं. लेकिन झारखंड प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग की मांग के अनुरूप नए कोर्स-ब्रांच खोलने में रुचि नहीं है.
दूसरे राज्यों में एन्वायरमेंट इन्फॉरमेटिक्स, कॉमर्शियल प्रेक्टिस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन एंड बिजनेस मैनेजमेंट, इंस्ट्रूमेंट टेक्नोलॉजी, एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, फिशरीज टेक्नोलॉजी, प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थेटिक्स, डाटा साइंस, कोडिंग, फायर इंजीनियरिंग, रोबोट्रीक्स, एथिक्ल हैकिंग, एनॉलिटिकल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशल इंटीलिजेंस, मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग, फिजिक्स इंजीनियरिंग और बायोसाइंस एंड बायो इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, एनर्जी एंड इंवॉरनमेंट जैसे कई रोजगारोन्मुखी कोर्स हैं.
इनमें करियर की बेहतर संभावनाएं हैं. वहीं झारखंड के विद्यार्थियों को बरसों पुरानी ब्रांच और कोर्स में ही दाखिलों का विकल्प मिलता है. यही कारण है कि वे नए और रोजगारोन्मुखी कोर्स में प्रवेश के लिए विद्यार्थी दूसरे राज्यों में चले जाते हैं. बावजूद इसके झारखंड प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज में नई ब्रांच और नए कोर्स नहीं खोलना समझ से परे है.
कागजों पर चल रहे तकनीक यूनिवर्सिटी
बीआइटी सिंदरी के एक प्राध्यापक का कहना है कि झारखंड में तकनीक विश्वविद्यालय कागजों पर चल रहा है. आज भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के बिना वीसी एक बैठक नहीं बुला पाते.
वहीं प्राइवेट कॉलेज चलाने वाले अधिकतर संचालकों का मकसद पैसा कमाना है. उन्हें बच्चों को पढ़ाने से कोई सरोकार नहीं है. कई कॉलेज की ढांचागत संरचना तो इतनी खराब है कि वह इंजीनियरिंग कॉलेज के मानदंड पर खरा ही नहीं उतरते. जिन कॉलेजों की ढांचागत संरचना थोड़ी बहुत अच्छी है, उनके यहां शिक्षक नहीं हैं.
राज्य के 16 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 6,870 सीटें हैं, जिसमें से मुश्किल से आधी भी नहीं भर पाती और 20 फीसद को भी नौकरी नहीं मिलती.
झारखंड के कॉलेज में सीटों की संख्या
1.बीआईटी सिंदरी- 725
2.यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, हजारीबाग- 252
3.टेक्नो इंडिया दुमका ( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप)- 315
4.टेक्नो इंडिया चाईबासा (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप)- 315
5.टेक्नो इंडिया रामगढ़ (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप)- 315
6.डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पलामू- 252
7.निलय एजुकेशनल इंस्टीट्यूट रांची- 378
8.रामचन्द्र चंद्रवंशी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पलामू- 441
9.राम गोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कोडरमा- 504
10.गुरु गोविंद सिंह एजुकेशनल सोसायटी बोकारो- 567
11.आरटीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रांची- 504
12.बीए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जमशेदपुर- 315
13.मेरीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट जमशेदपुर- 160
14.केके कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट धनबाद- 441
15.आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जमशेदपुर- 630
16.सीआईटी रांची- 756
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