
Lucknow: देश के सबसे विवादित और संवेदनशील मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामलला का बताया है. इस फैसले में विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है.
यानी विवादित स्थान पर भगवान राम की मंदिर बनेगी. साथ ही मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह देने का फैसला सुनाया है.
निर्मोही अखाड़े ने कहा है कि अयोध्या में विवादित जमीन पर मालिकाना हक का अपना दावा खारिज होने का उसे कोई अफसोस नहीं है.
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रामलला का पक्ष ले रहा था निर्मोही अखाड़ा
निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ पंच महंत धर्मदास ने कहा कि विवादित स्थल पर अखाड़े का दावा खारिज होने का कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि वह भी रामलला का ही पक्ष ले रहा था.
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के पक्ष को मजबूत माना है. इससे निर्मोही अखाड़े का मकसद पूरा हुआ है.
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में यह कहते हुए निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया कि निर्मोही अखाड़ा राम लला की मूर्ति का उपासक या अनुयायी नहीं है.
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित है.
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2.77 एकड़ जमीन पर था विवाद
अयोध्या में विवादित जमीन कुल 2.77 एकड़ की थी. वहीं इसके पास ही 67 एकड़ जमीन सरकार के पास की है. जबकि विवादित जमीन के पास ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की भी जमीन है.
राम जन्मभूमि की जमीन कुल 42 एकड़ है. इसके आसपास कई मंदिर भी हैं. लेकिन पूरा विवाद छोटे भूमिखंड को लेकर ही था, जहां बाबरी मस्जिद का गंबुद और राम लला विराजमान हैं. इस भूमिखंड में बाबरी मस्जिद ढांचा, राम लला विराजमान, राम चबूतरा, सिंहद्वार और सीता रसोई है.




