
NewDelhi : मोदी सरकार के एक कदम की तारीफ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने की है पी चिदंबरम के अनुसार पीएम मोदी की सरकार महंगाई को कम रखने में सफल हुई है. बता दें कि इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 के सत्र स्प्लिट वाइड ओपन: व्हाट इज एलिंग द इंडियन इकोनॉमी? में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इस बात को माना. लेकिन पी चिदम्बरम ने कहा, मोदी जी ने महंगाई कम रखी है. और यह कच्चे तेल की वजह से हुआ. लेकिन हम उनको कच्चे तेल की कीमतें घटाने का श्रेय तो नहीं दे सकते. चिदंबरम ने कहा कि तीन साल तक फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी नहीं की. किसान काफी परेशान रहे. आज धान, मिर्च, प्याज, टमाटर सबके भाव बहुत कम हैं. आंध्र प्रदेश में तो 60 रुपये में 28 किलो टमाटर मिल रहा है. ऊंची महंगाई बुरी है, लेकिन बहुत कम महंगाई भी नुकसानदेह है. कृषि एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा ने सवाल किया, ऊंचे ग्रोथ रेट के दौर में देश की बड़ी जनसंख्या वंचित ही रही है. कृषि ग्रोथ की बात करें तो दोनों सरकारों में हालत खराब रही है, किसानों की इनकम और हालत खराब है. 50 फीसदी आबादी के लिए बजट में सौतेला व्यवहार होता है.
इसके जवाब में चिदंबरम ने कहा, हम इसीलिए मिनिमम इनकम सपोर्ट का बोल्ड आइडिया ला रहे हैं, जिसे सरकार में आने पर हम संभव बनाएंगे. उन्होंने कहा कि अभी रायतू बंधु स्कीम जैसी जो योजनाएं चल रही हैं, वह सिर्फ खेत-जमीन के मालिकों को फायदा पहुंचा रही है. यह बंटाई पर खेती करने वाले किसानों, कृषि मजदूरों, गैर खेती वाले गांव के गरीबों और शहरी गरीबों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है.
यूपीए सरकार ने 8.40 लाख करोड़ रुपये का तेल सब्सिडी दी
वरिष्ठ पत्रकार आर जगन्नाथन ने पूछा, रघुराम राजन ने कहा था कि यूपीए में साल 2006-08 में भी बहुत खराब दौर था, जब एनपीए बहुत ज्यादा हो गया था, तब तो लीमैन संकट भी नहीं था. आज कहा जा रहा है कि एनपीए संकट में यूपीए सरकार ने 8.40 लाख करोड़ रुपये का तेल सब्सिडी दी . इसके जवाब में पी चिदम्बरम ने कहा,तब कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गयी थी. हम क्या कर सकते थे. सरकार में आने के बाद ऐसी बड़ी समस्या से निपटने के लिए सब्सिडी का सहारा लेना पड़ता है, क्या हम पूरी कीमत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते थे, क्या पेट्रोल-डीजल 100 रुपये लीटर बेच सकते थे?’जेएयनू की प्रोफेसर और अर्थशास्त्री जयति घोष ने कहा-यूपीए और यूपीए 2 में सोशल स्पेंडिंग में फर्क था, क्या आपको इसका पछतावा है?’ इसके जवाब में पी. चिदंबरम ने कहा, ‘तब हम भुगतान संतुलन संकट, चालू खाते के घाटे के संकट, वित्तीय घाटा के मामले में बड़े संकट का सामना कर रहे थे, इसलिए जीडीपी के प्रतिशत के लिहाज से सामाजिक खर्चों में कमी आई. यूपीए 2 के साढ़े तीन साल में विदेशी संकट का काफी असर रहा. जयती घोष ने पूछा, राहुल गांधी ने मिनिमम इनकम गारंटी की बात की है.
क्या यह व्यावहारिक है या यूनिवर्सल राइट टु वर्क ज्यादा फिजिबिल है? इसके जवाब में पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, यह योजना किसी पार्टी ने नशे में तो नहीं बनाई है, इसके लिए हमने प्रख्यात अर्थशास्त्रियों से बात की है. वे हमें इसके लिए मदद करने को तैयार हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने जो कुछ कहा है हम उस आइडिया पर काम कर रहे हैं. इसका विवरण मैं अभी नहीं बता सकता, लेकिन सरकार में आने के बाद इसे हम लागू करेंगे.




