
Ranchi: मशीनी युग और आराम तलब जिंदगी की वजह से हमारे कई परंपरागत प्रसाधन समय के साथ चलन से बाहर होते जा रहे हैं. इन्हीं में से एक ढेकी भी है, जो कभी सुखी व संपन्नता की निशानी थी. लोग घर में ढेकी देखकर बेटी ब्याहते थे. ढेकी से धान से चावल तैयार किया जाता है. स्थिति यह है कि नयी पीढ़ी के कई ग्रामीण युवाओं ने तो ढेकी का नाम भी सुना होगा.
आज धान कूटने के लिए बड़ी-बड़ी राईस मिलें, आटा चक्की की मशीनें उपलब्ध हो गए हैं. पहले जब ये मशीने नहीं थीं तब धान कूटने के लिए लकड़ी की भारी भरकम ढेंकी ही एक मात्र सहारा हुआ करती थी. गुजरे जमाने में प्रत्येक घरों में ढेकी होती थी. ढेकी तो अब सिर्फ म्यूजियम की शोभा वस्तु मात्र बन चुकी है.
प्रत्येक घरों में होती थी ढेकी
गुजरे जमाने में ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग प्रत्येक धरों में ढेकी होती थी. ढेकी के लिए अलग से कमरा होता था. जिसमें सिर्फ धान कूटने का ही काम किया जाता था. इसे ढेकी घर कहते थे. वैसे कई घरों के बरामदे में भी ढेकी देखने को मिलते थे. पैर से ढेंकी के एक सिरे को दबाया जाता है तो दुसरे तरफ धान पर ढेकी की चोट पड़ती थी और धान कूटने का कार्य परंपरागत तरीके से हो जाता था. बेटी ब्याहने से पूर्व लड़की के परिजन इसलिये ढेकी देखते थे कि शादी के बाद उनकी बेटी को धान कूटने के लिए दूसरे के घर नहीं जाना पड़ेगा.
ढेकी वाले चावल की गुणवत्ता का जोड़ नहीं
ढेकी से कूटे हुए धान में पौष्टिक तत्व अधिक मात्रा में रहती थी, जो खाने में भी काफी स्वादिष्ट होता था. ढेकी से कूटे चावल की खुशबू भी गजब की रहती थी.




