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AG Audit Report: घटिया कंसल्टेंसी सेवाओं के चलते राजस्व का नुकसान, टूरिज्म को बढ़ावा देने में जेटीडीसी रहा फेल

Ranchi : गुरुवार को AG (Auditor General) ऑफिस में AG ने 2014-19 की रिपोर्ट जारी की. प्रधान महालेखाकार इन्दू अग्रवाल ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि 2014-19 की अवधि में राज्य सरकार के स्तर से कई योजनाएं शुरू की गयीं. कुछ पर काम पूरा किया. पर इनमें से अधिकांश का आउटपुट बेहतर नहीं रहा. इनमें भारी अनियमितता सामने आयी. इसका सबसे बड़ा कारण घटिया कंसल्टेंसी सेवा रही. कंसल्टेंटों ने गलत सलाह दी, लापरवाही बरती. इसका खामियाजा सरकार को राजस्व के नुकसान के तौर पर उठाना पड़ा.

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कई योजनाओं में तरीके से सर्वे नहीं किया गया. ग्रामीण पुल-पुलिया के निर्माण का काम शहरी क्षेत्रों में कर दिया गया. एक ही नदी पर बेहद कम दूरी पर एक से अधिक पुल बनवा दिये. पुल के चयन का आधार ही नहीं था. जो पुल बनाये गये, उनमें से कई गिरे भी, और भी पुल गिर सकते हैं. लिंक रोड नहीं बनाया. सेफ्टी ऑडिट नहीं किया गया. पर्यटन क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं के बावजूद जेटीडीसी ने ढंग से पर्यटन नीति को लागू नहीं किया. इससे पर्यटकों को आकर्षित करने की रफ्तार खराब रही है. राजस्व का नुकसान हुआ. सरकार के विभिन्न स्कीमों में दोषियों को चिन्हित करते हुए कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है.

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पुल-पुलिया के काम में गड़बड़ी

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महालेखाकार के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में ग्रामीण कार्य, पथ निर्माण, जल संसाधन, पर्यटन, कृषि और पशुपालन, ऊर्जा सहित कई विभागों पर अनुपालन प्रतिवेदन को शामिल किया गया है. इसमें संबंधित विभागों द्वारा धरातल पर उतारी गयी योजनाओं और उसके परिणामों की जानकारी दी गयी है. ग्रामीण कार्य विभाग ने कई पुल पुलिया बनाये. 2001 से 2019 के दौरान 1881 पुलों की योजनाओं पर विभाग ने काम किया. इनमें भारी गड़बड़ियां दिखीं. कई जगहों पर पुल अधूरे मिले. उनका इस्तेमाल पार्किंग और पशुशाला के तौर पर किया गया.

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2014 से 2019 के दौरान विधायकों की अनुशंसा पर 496 पुल पुलिया बनाये गये. इसके अलावे प्रशासनिक स्तर पर 39 पुल की योजनाएं स्वीकृत की गयीं. ऑडिट के दौरान 8 जिलों में 214 पुलों की जांच की गयी. इनमें से 27 फीसदी पुल ग्रामीण नेटवर्क से बाहर मिले. फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर सड़क निर्माण का काम देने की वजह से सरकार को 13 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ. दुमका, हजारीबाग में हाईटेक पौधशाला के निर्माण के नाम पर 2.78 करोड़ खर्च किया गया था जो बेकार साबित हुआ है.

पर्यटन के विकास पर गंभीरता नहीं

इंदू अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन के समेकित विकास और विपणन के लिए मास्टर प्लान तैयार ही नहीं किया गया. टूरिज्म क्षमताओं के समुचित उपयोग के लिए हर जिले में पर्यटन की संभावित क्षमता का विस्तृत सर्वेक्षण नहीं हुआ. झारखंड पर्यटन नीति 2015 को लागू किये चार साल से अधिक समय हो गये पर पर्यटन इकाईयों के लिए न्यूनतम मानक तय नहीं हो सके. 2004-2018 के बीच 39.62 करोड़ की लागत से 29 प्रोजेक्ट पर काम हुए पर तरीके से इसका उपयोग ही नहीं किया जा सका. स्थल का चयन, पर्यटकों की सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं को तय किये बिना ही टूरिस्ट सेंटर के नाम पर पैसे बर्बाद कर दिये गये.

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