
Ranchi : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने कहा है कि झारखंड में कोई भी प्रसूता इलाज के अभाव में दम नहीं तोड़ेगी. नवजात बच्चों की मृत्युदर को भी शून्य किया जाएगा. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर होने वाली गर्भवती महिलाओं को जरुरत के हिसाब से फौरन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. जिससे इनका उपचार समय पर होगा. मरीजों को बड़े अस्पताल रेफर करने के फौरन बाद कॉल सेंटर को पूरी जानकारी दी जाएगी. जिससे इनका इलाज बगैर देरी के शुरू करने में आसानी होगी.
Ranchi : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने कहा है कि झारखंड में कोई भी प्रसूता इलाज के अभाव में दम नहीं तोड़ेगी. नवजात बच्चों की मृत्युदर को भी शून्य किया जाएगा. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर होने वाली गर्भवती महिलाओं को जरुरत के हिसाब से फौरन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. जिससे इनका उपचार समय पर होगा. मरीजों को बड़े अस्पताल रेफर करने के फौरन बाद कॉल सेंटर को पूरी जानकारी दी जाएगी. जिससे इनका इलाज बगैर देरी के शुरू करने में आसानी होगी.
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गर्भवती महिलाओं को मिले अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा
निधि खरे ने सभी गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा मुहैया कराने के लिए लेडी डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने का निर्देश दिया है. जिससे इनकी बीमारी की जानकारी समय पर मिलेगी. उन्होंने कहा है कि विभाग हर हाल में मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए प्रतिबद्ध है. स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे आरसीएच सभागार में आयोजित लक्ष्य मेंटरिंग ग्रुप की बैठक को संबोधित कर रही थी.
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राज्य के अस्पतालों के लेबर रूम को अपग्रेड करने का निर्देश
बैठक में राज्य के अस्पतालों के लेबर रूम को अपग्रेड करने पर जोर दिया. उन्होंने लेबर रूम को सभी सुविधा से लैस करने का निर्देश दिया है. लेबर रूम को अपग्रेड करने से प्रसव के दौरान महिलाओं पर खतरा कम होगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य मातृ शिशु मृत्युदर शून्य करना है. इसके लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़े तमाम लोगों को प्रतिबद्धता के साथ काम करना होगा. संस्थागत प्रसव के लिए लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है. इससे मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर होगा.
मातृ-शिशु मृत्युदर कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच हो
मातृ-शिशु मृत्युदर कम करने के लिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच हो. इसके लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाता है. जिला अस्पतालों को मजबूत करने की योजना पर काम चल रहा है. जिसके तहत सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) और एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) खोलने का लक्ष्य रखा गया है. इससे मृत्युदर कम करने में आसानी होगी.
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