
- यूनिवर्सिटी और रिसर्च के छात्रों को जीवों और वनस्पतियों पर शोध करना होगा आसान
- शोधार्थियों को यह पता चल सकेगा कि कौन से जीव और वनस्पति कहां मिलते हैं
- ग्रामीणों के उपयोग में आनेवाली वनस्पतियों की बिक्री से मिलेगी एक से तीन फीसदी राशि
Ranchi: झारखंड के जीव-जंतु और वनस्पतियों पर शोध करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी है. अब एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी जीव-जंतु और वनस्पतियों की जानकारी उनके लिए उपलब्ध होगी. इसके लिए पिपुल बायोडायवर्सिटी रजिस्टर पोटर्ल लॉन्च किया गया है. अगर किसी मालूम करना है कि चिरैता किस क्षेत्र में मिलता है, तो पोटर्ल देखकर यह मालूम हो जायेगा कि चिरैता किन क्षेत्रों में पाया जाता है. बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता बोर्ड) में कृषि वैज्ञानिक, जीव-जंतु विशेषज्ञ, वनस्पति विशेषज्ञ और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को शामिल किया गया है.
3400 पंचायतों में सात सदस्यीय समिति गठित
प्रदेश के 24 जिलों, 31 नगर निगम क्षेत्र, सभी प्रखंडों और 3400 पंचायतों में सात सदस्यीय जैव विविधिता प्रबंधन समिति गठित कर ली गई है. अगले चार महीनों में सभी 4700 पंचायतों में समिति का गठन कर लिया जायेगा. समिति में उस क्षेत्र के सात सदस्यों को शामिल किया गया है. जो उस क्षेत्र में पाये जाने वाले जीव-जंतु और वनस्पतियों की जानकारी एकत्र करेंगे.
हर समिति के पास होगा एक रजिस्टर
हर समिति के पास एक रजिस्टर होगा. जिसमें उस क्षेत्र में पाये जाने वाले जीव-जंतु और वनस्पतियों का नाम दर्ज करना होगा. बायोडायवर्सिटी बोर्ड इन वनस्पतियों का बॉटनिकल नाम भी दर्ज करेगा. जो पोर्टल पर उपलब्ध होगा. इसमें खास यह है कि जिन वनस्पतियों की बिक्री की जायेगी, उसकी एक से तीन फीसदी राशि समिति के सदस्यों को मिलेगी. अगर वनस्पतियों के कोई उत्पाद बनाया जाता है तो उसकी बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि का तीन से पांच फीसदी हिस्सा समिति के सदस्यों को मिलेगा. साथ ही उस वनस्पति के संरक्षण पर भी जोर दिया जायेगा.
क्या कहते हैं पीसीसीएफ
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एलआर सिंह के अनुसार, इससे वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण के साथ शोधार्थियों को काफी फायदा होगा. साथ ही नये वनस्पतियों का भी पता चलेगा. सभी चीजों की जानकारी एक पोर्टल पर उपलब्ध होगी. शोध में यह भंडार का काम करेगा.
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