

संजय यादव
झारखंड और बिहार में नक्सली गतिविधियों से जुड़े मामलों में लंबे समय से वांछित संजय यादव को महाराष्ट्र के ठाणे से गिरफ्तार किया गया है। संजय यादव पर 13 लाख रुपये का इनाम घोषित होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह झारखंड और बिहार के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 53 मामलों में वांटेड था। उसकी गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान में एक अहम सफलता माना जा रहा है।
ठाणे के ठाकुर्ली इलाके से हुई गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने ठाणे जिले के ठाकुर्ली इलाके में कार्रवाई करते हुए संजय यादव को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान संजय सरजू यादव उर्फ गोदाराम यादव के रूप में बताई जा रही है। वह झारखंड के पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के देवगण गांव का निवासी है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संजय यादव पिछले करीब दस दिनों से ठाकुर्ली इलाके में छिपकर रह रहा था। खुफिया सूचना मिलने के बाद ATS ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और उसे हिरासत में लिया।
नक्सली संगठन की जोनल कमेटी से जुड़ा होने का आरोप
संजय यादव को प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी की जोनल कमेटी का सदस्य बताया जा रहा है। झारखंड के पलामू और आसपास के क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
उसके खिलाफ झारखंड और बिहार में दर्ज 53 मामलों में वांटेड होने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में उसकी कथित भूमिका और आपराधिक गतिविधियों को लेकर जांच एजेंसियां आगे की पूछताछ कर सकती हैं।
झारखंड पुलिस को सौंपा गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र ATS ने संजय यादव को झारखंड पुलिस के हवाले कर दिया। अब झारखंड पुलिस उससे नक्सली नेटवर्क, संगठन के अन्य सदस्यों, संभावित सहयोगियों और विभिन्न मामलों में उसकी भूमिका को लेकर पूछताछ कर सकती है।
संजय यादव की गिरफ्तारी से झारखंड और बिहार में नक्सल विरोधी अभियान को महत्वपूर्ण बढ़त मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुट सकती हैं कि वह महाराष्ट्र में किस उद्देश्य से छिपा हुआ था और उसके स्थानीय संपर्क कौन-कौन थे।




