Uncategorized

झारखंड राज्‍य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने सीएम को ज्ञापन देकर कहा- 17 मार्च तक मांग पूरी करें, नहीं तो करेंगे आंदोलन

Ranchi : झारखंड राज्‍य भूमि सुधार कर्मचारी संघ की एक शिष्‍टमंडल ने बुधवार को राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव तथा वित्त सचिव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र सौंपा. ज्ञापन में संघ ने सीएम को 17 मार्च तक का समय देते हुए अपनी चार प्रमुख मांगे रखी हैं और कहा है कि मांगे नहीं मानी गई तो 18 मार्च को बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय की जायेगी. इसमें संघ ने प्रोन्‍नति के लिए विभागीय भ्रष्‍टाचार की ओर भी मुख्‍यमंत्री का ध्‍यान आकृष्‍ट कराया है और जांच की मांग की है.

अपने ज्ञापन में झारखंड राज्‍य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने कहा है कि पिछले साल राजस्‍व कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बार सरकार से हुए समझौता के तहत कर्मचारियों को 2400 रुपये ग्रेड पे देने की बात तय हुई थी, लेकिन आज तक राजस्‍व कर्मचारियों को 2400 रुपये ग्रेड पे नहीं दिया गया. यह समझौता के विरुद्ध है. इससे राज्‍य के राजस्‍व कर्मचारियों में व्‍यापक क्षोप और रोष व्‍याप्‍त है.

इसे भी पढ़ें –झारखंड हाईकोर्ट भवन निर्माण :  एल वन चुनी गयी कंपनी बढ़ा रही है 2900 फीसदी तक अपना रेट, 265 करोड़ में बनने वाला भवन बनेगा करीब 600 करोड़ की लागत से 

इसे भी पढ़ें –  अजब प्यार की गजब कहानी : पहली मुलाकात में प्यार, दूसरी में शादी, तीसरे में ब्लैकमेलिंग व बेटी का अपहरण और खूंटी पुलिस खामोश !

समझौता के अनुरूप 2400 रुपये ग्रेड पे शीघ्र दिया जाये

ज्ञापन के माध्‍यम से संघ ने मुख्‍यमंत्री से कई मांगे की है. उन्‍होंने मांग की है कि समझौता के अनुरूप 2400 रुपये ग्रेड पे शीघ्र दिया जाये. राजस्‍व कर्मचारियों को राजस्‍व सेवा संवर्ग के गठन में पदनाम बदल कर राजस्‍व उप-निरीक्षक करते हुए मूल पर के पद के तौर पर चिन्हित किया गया है, लेकिन कैडर के अंर्तगत चिन्हित पदों पर प्रोन्‍नति का प्रावधान बाधित कर दिया गया. संघ से मुख्‍यमंत्री से अनुरोध किया है कि मूल पर पर नियुक्ति की योग्‍यता के आधार पर ही वरीयता के अनुसार 100 प्रतिशत उच्‍चतर पदों पर प्रोन्‍नति का प्रावधान किया जाय और तब तक के लिए राजस्‍व सेवा संवर्ग के गठन पर तत्‍काल रोक लगायी जाये. संघ ने मुख्‍यमंत्री को बताया है कि प्रोन्‍नति में वरीयता को नकारते हुए स्‍नातक योग्‍यता वाले कर्मचारियों के लिए विभागीय सीमित प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन और वरीय स्‍नातक कर्मचारियों को ही प्रोन्‍नति दिया जाना भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा दे रही है. उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री से इस पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है.

इसे भी पढ़ें – त्रिपुरा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर से गिरायी लेनिन की प्रतिमा, सीपीएम दफ्तरों में तोड़फोड़

इसे भी पढ़ें – रघुवर सरकार ने सीएम के प्रधान सचिव सुनील बर्णवाल के ससुर को बनाया फार्मेसी काउंसिल का अध्यक्ष, वाइफ पहले से हैं कानूनी सलाहकार

संघ ने सीएम से पदस्थापन प्रकरण की जांच कराने की मांग की

संघ ने कहा है कि पिछले विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर सफल घोषित किये गये राजस्‍व कर्मचारियों का पदस्‍थापन अंचल निरीक्षक के पद पर किया गया है. पदस्‍थापन के दौरान विभाग के द्वारा यह नीति अपनायी गयी थी कि गृह जिला और वर्तमान पदस्‍थापति जिला में प्रोन्‍नत पद पर राजस्‍व कर्मचारियों को अंचल निरीक्षक के पद पर पदस्‍थापित नहीं किया जायेगा. लेकिन ऐसे कई प्रोन्‍नत कर्मचारियों को उनके गृह जिला या प्रोन्‍नति पूर्व पदस्‍थापित जिला में ही अंचल निरीक्षक के तौर पर पदस्‍थापित कर दिया गया. संघ ने सीएम से इस प्रकरण की भी जांच कराने की मांग की है. संघ ने सीएम से कहा है कि राजस्‍व कर्मियों को उपलब्‍ध कराये गये टैब के साथ दो सप्‍ताह के अंदर इंटरनेट और सिम की सुविधा उपलब्‍ध करायी जाये. ऐसा नहीं हुआ तो सभी राजस्‍व कर्मी टैब वापस कर देंगे. ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में झारखंड राज्‍य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के अध्‍यक्ष राजेश कुमार, महासचिव कुमार सत्‍येंद्र भारतद्वाज, कोषाध्‍यक्ष फिरोज खान, अशोक कुमार सिंह, सविच प्रवीण कुमार, सदस्‍य सुकेश रंजन, सदस्‍य आशिफ रजा शामिल थे.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button