
Ahmedabad : प्रधानमंत्री के राज्य गुजरात के आठ जिला पंचायतों के तहत 120 ग्राम पंचायतों में 29 फीसदी घरों में अभी भी शौचालय नहीं है. इस सूची में बनासकांठा, छोटाउदेपुर, दाहोद, डांग, पाटण, वलसाड, जामनगर व जूनागढ़ जिले शामिल हैं. इनमें सार्वजनिक व निजी दोनों तरह के शौचालय हैं.
गुजरात सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2017 को सूबे के सभी जिलों को ओडीएफ घोषित किया गया था. वहीं केन्द्र सरकार ने फरवरी 2018 में लोकसभा में यह कहा था कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गुजरात सहित 11 राज्यों को ओडीएफ घोषित किया गया है.
लेकिन अगर आप रिपोर्ट की माने तो खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किये जाने के बावजूद गुजरात को अभी भी लाखों शौचालयों की जरूरत है. एक आरटीआई के जवाब के अनुसार गुजरात के ग्रामीण घरों में अभी लाखों शौचालयों की आवश्यकता है.
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1.40 लाख परिवार है शौचालय विहीन
आरटीआई कार्यकर्ता हितेश चावडा द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में जिला प्रशासन ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण योजना के तहत दाहोद में इस वर्ष मई-जून तक 1.40 लाख परिवारों को शौचालय नहीं मिले हैं.
इसके अलावा वडोदरा में 17,874 परिवारों, छोटा उदयपुर में 26,687, कच्छ में 14,878, साबरकांठा में 34,607, पाटन में 27,180, महीसागर में 19,526 और अमरेली जिले में 21,320 परिवारों के घरों में शौचालय नहीं हैं.
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एक लाख अतिरिक्त शौचालयों के निर्माण को मंजूरी : विभाग सचिव
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की आवश्यकताएं हर वर्ष आने की उम्मीद है क्योंकि परिवार बंट रहे है.
राज्य ग्रामीण विकास विभाग ने जवाब में कहा कि केन्द्र सरकार की योजना शुरू होने के बाद से गुजरात सरकार ने वर्ष 2014 से 32 लाख से अधिक शौचालयों के निर्माण पर 2,893 करोड़ रुपये खर्च किये है. इसमें से 1,778.96 करोड़ रुपये केन्द्र ने मंजूर किये.
विभाग की आयुक्त और सचिव मोना खानधर ने बताया कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को अपनी सुविधा मिलने से पहले कई और वर्षों तक शौचालयों का निर्माण करना होगा.
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उन्होंने कहा, जैसे कि नये परिवार बनते हैं, वयस्क पुत्रियों और पुत्रों का विवाह हो जाता है, भाई अलग हो जाते हैं और उनके अलग से घर हो जाते हैं। इसलिए इस तरह की जरूरत होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि राज्य को ओडीएफ से मुक्त घोषित किये जाने के बाद गुजरात सरकार इस वर्ष ग्रामीण इलाकों में पहले ही एक लाख अतिरिक्त शौचालयों के निर्माण को मंजूरी दे चुकी है.




