
Ranchi : प्रदेश में घर-घर बिजली पहुंचाने का दावा अब तक हकीकत में नहीं बदल पाया है. बगैर ट्रांसमिशन लाइन के बिजली पहुंचाना सरकार के लिये चुनौती बन गयी है. प्रदेश की महत्वाकांक्षी ट्रांसमिशन लाइन योजना में अब तक पेंच फंसा हुआ है. अब तक पांच ट्रांसमिशन लाइन और तीन ग्रिड का निर्माण अधर में लटका हुआ है. पीजीसीआइएल (पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) को प्रदेश में ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड बनाने का प्रोजेक्ट सौंपा गया था. लेकिन अब तक आधा दर्जन से अधिक ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड का काम पूरा नहीं हो पाया है. ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण पीजीसीआइएल के ही लाइन से एनटीपीसी, पीटीसी और एनएचपीसी से बिजली ली जा रही है. दूसरी कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन से बिजली लेने के एवज में हर माह सात करोड़ रुपये का भी भुगतान किया जा रहा है.
करार के बीत गये चार साल
ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड निर्माण को लेकर पीजीसीआइएल के साथ जून 2014 में करार हुआ था. करार के मुताबिक दिसंबर 2015 तक 19 ट्रांसमिशन लाइन और 10 ग्रिड का निर्माण कार्य पूरा करना था. करार की मियाद पूरी होने के बावजूद भी काम पूरा नहीं हुआ. इसके बाद पीजीसीआइएल को कई बार अवधि विस्तार भी दिया गया. अब अगले साल ट्रांसमिशन लाइन को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
390 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
तय समय पर काम नहीं होने के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट भी बढ़ता चला गया. करार के वक्त यह प्रोजेक्ट 1310 करोड़ का था. अब यह बढ़कर 1700 करोड़ रुपये का हो गया है. इस हिसाब से 390 करोड़ का अतिरिक्त भार राज्य सरकार पर पड़ा है. पीजीसीआइएल को अब तक कांम के एवज में लगभग 1200 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है. करार के वक्त पीजीसीआइएल को 469 करोड़ रुपये दिये गये थे. इसके बाद जुलाई 2014 में 175 करोड़ रुपये दिये गये. जनवरी 2015 में 50 करोड़ रुपये दिये गये. इसी साल फिर 483 करोड़ रुपये दिये गये.
इन लाइनों में है फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच
- बेड़ो-पतरातू ट्रांसमिशन लाइन
- पतरातू-लातेहार ट्रांसमिशन लाइन
- लातेहार-एस्सार ट्रांसमिशन लाइन
- दुमका-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन
- गोविंदपुर- टीवीएनएल ट्रांसमिशन लाइन
- चतरा-लातेहार ट्रांसमिशन लाइन
इन ग्रिडों का काम पूरा नहीं
पतरातू ग्रिड
लातेहार ग्रिड
लोहरदगा ग्रिड
क्या कहते हैं संचरण निगम के निदेशक
संचरण निगम के निदेशक अतुल कुमार के अनुसार फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुयी है. अगले साल तक प्रोजेक्ट पूरा हो जायेगा.




