
NewDelhi : पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति रहे हामिद अंसारी ने एक साल के बाद अपने विदाई समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिये गये भाषण पर प्रतिक्रिया दी है. हामिद अंसारी ने पीटीआई को दिये अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि विदाई भाषण में पीएम की टिप्पणी को बहुत से लोग मानते हैं कि वह मौके के लिहाज से ठीक कॉमेंट नहीं था. कहा कि काफी लोगों का ऐसा विचार था कि पीएम के विदाई भाषण के उस समय की गयी उनकी टिप्पणी परंपरा और संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं थी.
10 अगस्त 2017 को हामिद अंसारी के कार्यकाल का आखिरी दिन था
बता दें कि 10 अगस्त 2017 को हामिद अंसारी के कार्यकाल का आखिरी दिन था. परंपरा के अनुसार राजनैतिक दल और सदन के सदस्यों ने हामिद अंसारी को विदाई दी थी. राज्यसभा सभापति के रूप में कार्यकाल के आखिरी दिन विदाई भाषण में प्रचलित परंपरा के अनुसार पीएम मोदी ने हामिद अंसारी का शुक्रिया अदा करते हुए राजनयिक और उपराष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल की सराहना की थी.
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मुस्लिम देशों में राजदूत के रूप में मेरे कार्यकाल का भी जिक्र किया था
अब लगभग एक साल बाद हामिद अंसारी ने अपने इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदाई समारोह में मेरे कार्यकाल की प्रशंसा के दौरान मेरे व्यक्तिगत रुझानों की ओर भी संकेत दिये थे. पीएम ने मुस्लिम देशों में राजदूत के रूप में मेरे कार्यकाल का भी जिक्र किया था. कहा कि राजदूत के पद से सेवानिवृत होने के बाद अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर मेरी सक्रियता की तरफ पीएम ने संकेत किया था.
अंसारी के अनुसार शायद उस दिन पीएम मोदी का संकेत बेंगलुरु में दिये गये मेरे उस भाषण और राज्यसभा टीवी को दिए इंटरव्यू का था, जिसमें मैंने कहा था कि अल्पसंख्यक और कुछ दूसरे समुदाय के युवाओं में बेचैनी और असुरक्षा का भाव है. बता दें कि हामिद अंसारी के इस कॉमेंट पर उस समय सोशल मीडिया में काफी हंगामा भी हुआ था. राजनीतिक गलियारों में भी कुछ हलचल थी.
कुछ लोगों ने हामिद अंसारी का विरोध किया था, हालांकि कुछ लोग उनसे सहमत दिखे थे. हामिद अंसारी ने सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना करने वालों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ वफादार लोगों ने इस बयान के खिलाफ एक तरीके से दुष्प्रचार की मुहिम ही छेड़ दी. दूसरी तरफ, कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने अखबारों में इससे संबंधित लेख और गंभीर संपादकीय लिखे और उनमें माना कि विदाई समारोह के दौरान पीएम की टिप्पणी संसदीय परंपरा के अनुकूल नहीं थी.
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