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Ranchi, 31 October : रिम्स की दीवार इन दिनों लापता लोगों के पोस्टरों से भरा हुआ है. इस अस्पताल में आने वाले मरीज अपने परिजन से बिछड़ जाते है. मानसिक रूप से विक्षिप्त मरीज इलाज के लिए आते हैं और गुम हो जाते हैं. अस्पताल परिसर की दीवारों पर बाहर के लापता लोगों की पोस्टर भी चिपका दी जाती है. ऐसे में रिम्स की दीवार लापता लोगों को ढूंढने का एक सहारा है. जिसमें लापता का नाम, पता, फोन नंबर के साथ घर तक जिंदा या मुर्दा पहुंचाने वाले व्यक्ति को नगद इनाम देने का भी जिक्र होता है. लेकिन आज तक इसमें से कितने लापता लोग सुरक्षित अपने घर पहुंचे इसका अंदाजा नहीं है. रिम्स परिसर एकड़ों में फैला हुआ है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से यहां सीसीटीवी कैमरा की व्यवस्था भी की गई है. लेकिन रिम्स कैंपस से लापता लोगों के खोजबीन में कैमरा का कोई योगदान नहीं है.
रिम्स कैंपस से लापता हुआ मरीज कलीम अंसारी
17 सितंबर को गिरिडीह जिले के सरिया गांव के रहने वाले कलमी अंसारी अपने पत्नी और बेटा मिन्हाज अंसारी के साथ इलाज करवाने आये थे. मरीज के परिजन कलीम को रेजिस्ट्रेशन काउंटर के पास बिठा कर कुछ मिनट के लिए किसी आवश्यक काम से गए. वापस लौटने पर मरीज को वहां नहीं पाया. आज तक लापता कलीम का पता नहीं चल सका.
रिम्स से गुम होने की नहीं है संभावना : डॉ आरके श्रीवास्तव
रिम्स में मरीजों के लापता होने और दीवारों पर लापता लोगों की पोस्टर चिपका देने के बाबत पूछे गए सवाल के विषय मे रिम्स निदेशक डॉ. आरके श्रीवास्तव ने कहा कि जिन मरीजों के साथ परिजन होते हैं उनके लापता होने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि रिम्स में ऐसे लावारिस लोगों को पीसीआर इलाज के लिए छोड़ कर चले जाते हैं, जिनका कोई नहीं होता है. अंत में गुमशुदगी की बात सामने आती है. लेकिन जिन मरीजों के साथ परिजन होते हैं उनके लापता होने का सवाल ही नहीं उठता है.




