Saurabh Shukla
Ranchi, 03 October : सांप का नाम सुनते ही शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. लोग सांप को देखते ही भाग खड़े होते हैं या सांप को मारने पर उतारु हो जाते हैं. लोगों के मन में ऐसी धारणा है कि सांप के काटने से इंसान की मौत हो जाती है. लेकिन रांची के एमएससी जूलॉजी का एक छात्र विवेकानंद पिछले 14 वर्षों से सांपों को पकड़कर उसका संरक्षण करते हुए जंगलों में छोड़ देता है. विवेकानंद की नौवीं क्लास से ही सांपों के प्रति आकर्षण ने उसे स्नेक बॉय का नाम दे दिया. अब तक झारखंड के विभिन्न जिलों से 1700 सांप पकड़कर उन्होंने विषधर को बचाने का काम किया है.
भारत में प्रतिवर्ष एक लाख लोग सर्पदंश का होते हैं शिकार
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष एक लाख लोगों को सांप काटता है. जिसमें लगभग 45000 लोगों की मौत हो जाती है. वहीं झारखंड में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1200 लोगों की मौत सांप काटने से होती है. जबकि विवेकानंद की माने तो यह आंकड़ा लगभग 2000 के आसपास होगी.
देश में 300 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं
पूरे भारतवर्ष में 300 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं. लेकिन इसमें से मात्र 3 सांप ही विषैला होता है. जिसमें कोबरा, करैत, रसल वाइपर (सियार चंदा) शामिल हैं.
सांप के जहर से होता है कैंसर का इलाज
सांप में पाए जाने वाले जहर से एंटीवेनम दवाई बनायी जाती है. इस दवा से सर्पदंश के शिकार हुए लोगों का इलाज किया जाता है. वहीं, कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने वाला जीवन रक्षक दवा कीमोथैरेपी में भी इसका प्रयोग किया जाता है.
लोगों को सांपों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य : विवेकानंद
विवेकानंद की माने तो सांप प्रकृति का एक ऐसा जीव है जो प्रकृति चक्र को बनाए रखता है. सांप का मुख्य भोजन चूहा है. चूहे 25% फसल बर्बाद कर देते हैं. ऐसे में सांप चूहे को खाकर फसल को बर्बादी से रोकता है. विवेकानंद का लक्ष्य है कि झारखंड में देश का सबसे बड़ा स्नेक पार्क का निर्माण हो ताकि सांप को संरक्षित किया जा सके. वहीं अपना एनजीओ (स्नेक) सरवाइवल ऑफ नेचर एंड कीपर ऑफ अर्थ के माध्यम से सांपो के संरक्षण और लोगों में इस जीव को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे है.




