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Sahebganj, 25 September: मेसो परियोजना के तहत साहेबगंज जिले में चल रही पहाड़िया आवासीय विद्यालय के छात्र व छात्रा कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं. न्यूज विंग की टीम ने सरकार की इस योजना की पड़ताल करने की कोशिश की. इसी क्रम में टीम जिले के बोरियों प्रखंड के बान्झी पहाडीया आवासीय विद्यालय व बंदरकोल बालिका आवासीय विद्यालय पहूंची. पड़ताल के दौरान विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की पोल खुली.
वर्ष 2015 में ही स्कूल में सोलर सिस्टम लगा लेकिन नहीं मिली बिजली
पड़ताल के दौरान पता चला कि इस स्कूल में शिक्षकों के लिए कुल ग्यारह पोस्ट हैं जिसमें दस शिक्षक मौजूद थे वर्ग में छात्रों की उपस्थिति भी सही थी. यहां दी जा रही सुविधाओं के बारे में बात करें तो यह एक आवासीय स्कूल है लेकिन बावजूद इसके छात्रों के लिए बिजली की सुविधा नहीं है. वर्ष 2015 में विभाग ने जेड्का कम्पनी के द्वारा स्कूल में सोलर सिस्टम लगवाया था लेकिन शिक्षक राजेश कुमार ने बताया की सोलर सिस्टम लगने के बाद एक या दो दिन चला. और बिजली की समस्या दूर नहीं हुई. छात्रों के रहने के छात्रावास पूरी तरह से जर्जेर अवस्था में हैं.
बिजली नहीं रहने से नहीं हो पाती छात्रों की पढ़ाई
छात्र चूमा पहाड़ीया ने बताय कि रात मंे काफी परेशानी होती है. बिजली नहीं रहने से पढ़ाई नहीं कर पाते, अंधेरे में छात्रों को डर भी लगता है. बता दें कि इस साल स्कूल के दसवीं बोर्ड का रिज़ल्ट का 74 प्रतिशत रहा है. एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है. स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पर जोर दे रही है. इस स्कूल में भी कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था करने के लिये अलग से कक्ष बनवाया गया कई सिस्टम लगाये गये लेकिन विडम्बना देखिये आजतक यहां कभी कंप्यूटर शिक्षक की पोस्टिंग नहीं हुई, जिससे छात्रों को कंप्यूटर की शिक्षा नहीं मिल पा रही. स्कूल की चारदीवारी का भी बुरा हाल है. पूरी चारदीवारी टूट चूकी है. स्कूल के कैंपस में मवेशी आ जाते हैं.
आजतक ठीक करने नहीं आये सोलर सिस्टम
स्कूल के हेडमास्टर महेश सिंह ने बताया, कई बार विभाग को जानकारी दी गयी सोलर सिस्टम काम नहीं कर रहा है. जेड्का कम्पनी को फोन पर सूचना दी, तो उन्होंने आजकल आकर ठीक कर दूंगा ऐसी बात कही लेकिन कभी नहीं आये.
बालिका पहाड़ीया आवासीय विद्यालय का भी हाल बेहाल
बालिका पहाड़ीया आवासीय विद्यालय की भी स्थिति ऐसी ही मिली. इस विद्यालय में बिजली की व्यवस्था थी लेकिन पीने के पानी की घोर कमी है.
सुविधा के नाम पर ठगे जा रहे स्कूल और छात्र
क्षेत्र में स्कूल की ऐसी स्थिति पर कई सवाल खड़े होते हैं. आवासीय विद्यालय में सुविधा देने का ढोंग तो किया जा रहा है लेकिन सिर्फ दिखाने तक. हकीकत में कोई भी सुविधा यहां के छात्रों को लाभ नहीं पहुंचा रही.




