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Ranchi, 21 September: झारखंड में सरकार 1000 दिन का जश्न मना रही है और राज्य में गुड गवर्नेंस देने का दावा कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि यहां के सिनियर अधिकारी राज्य से मुंह मोड रहे हैं. झारखंड के दर्जनों आईएएस अधिकारी राज्य छोडकर चले गये, कई अधिकारी राज्य छोडकर जाने की लिस्ट में शामिल हैं. इसके लिए कई अधिकारियों ने सेंट्रल डेप्यूटेशन पर जाने का आवेदन तक दे डाला है.
आखिर अधिकारियों का झारखंड से क्यों हो रहा मोहभंग
राज्य की रघुवर सरकार ने अपना 1000 दिन पूरा कर लिया. सीएम और मंत्री 1000 दिन को उपलब्धि भरा टर्म मान रहे है. उनके अनुसार राज्य में 1000 दिनों में जितना विकास हुआ वो पिछले 14 सालों में कभी नहीं हुआ. फिर राज्य का विकास दर भी उंचाई छू रहा है. मोमेंटम झारखंड का हाथी भी उड रहा है. तब ऐसे में अब सवाल उठना लाजमी है कि राज्य के विकास दर को उंचाई पर पहुंचाने वाले अधिकारियों का यहां से मोहभंग क्यों हो गया. आखिर उन्हें मुख्यमंत्री का गुड गवर्नेंस रास क्यों नहीं आ रहा है. क्या अधिकारी सरकार की सुनना नहीं चाहते या फिर वे सरकार के जबरन काम के खिलाफ हैं.
कई ब्यूरोक्रेट्स जा चुके हैं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर
1000 दिनों में सरकार ने कई उपलब्धियां अपने नाम की, लेकिन जिन अधिकारियों के भरोसे सरकार ने ये सफर तय किया वो उनका साथ छोडते चले गये. इसी हजार दिनों के दौरान करीब दर्जन भर आइएएस और आइपीएस अधिकारी झारखंड छोड केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा चुके हैं और इतने ही कतार में खडे हैं. वहीं बीजेपी का मानना है कि जो अधिकारी काम को लेकर गंभीर नहीं हैं वहीं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं.
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झारखंड छोड़ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों के नाम
1. राजीव गौवा, आईएएस
2. युपी सिंह, आईएएस
3. डीके तिवारी, आईएएस
4. अलका तिवारी, आईएएस
5. एनएन सिन्हा, आईएएस
6. एसएस मीणा, आईएएस
7. एसएन प्रधान, आईपीएस
8. एमएस भाटिया, आईपीएस
9. सम्पत मीणा, आईपीएस
10. केएन चौबे, आईपीएस
11. अजय भटनागर, आईपीएस
12. प्रवीन सिंह, आईपीएस
जो अधिकारी जाने वाले हैं
1. अमित खरे, आईएएस
2. निधि खरे, आईएएस
3. श्रीनिवासन, आईएएस
4. केरवि कुमार, आईएएस
5. एमएस भाटिया, आईएएस
6. संजय कुमार, आईएएस
अधिकारियों को केंद्र में दिख रहा अपना करियर
अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का सिलसिला हाल ही में बढा है. अधिकारियों की ये लिस्ट देखकर इतना तो साफ है कि अधिकारी अब झारखंड में काम नहीं करना चाहते हैं. उनको उनका करियर राज्य से अधिक केंद्र में ही दिख रहा है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इच्छा रखने वाले कई ऐसे अधिकारी हैं जो झारखंड की मिट्टी में पले-बढे हैं. उनको अपने राज्य से लगाव है. वे झारखंड की संस्कृति से भली-भांति परिचित भी हैं. ऐसे में दूसरे राज्यों के गृहक्षेत्र वाले अधिकारियों के मुकाबले राज्य के विकास पर उनका ध्यान ज्यादा केंद्रीत होगा.




