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Ranchi, 18 September : पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी ने सरकार के एक हजार दिन पूरे होने पर सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सरकार ने मुख्यमंत्री जन वन योजना की शुरूआत की. वृहत स्तर पर राज्य में वनरोपण, वनरक्षियों की नियुक्ति, शहरी वनों एवं पार्कों का सृजन किया. जंगली जानवरों के हमले में जान की क्षति होने पर अब मुआवजा राशि को 2.50 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रूपये कर दी. वहीं घायल होने पर सरकार 1 लाख रूपए देगी. अपर मुख्य सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी सोमवार को सूचना भवन के सभागार में प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि एक हजार दिनों में राज्य में लगभग 8.56 करोड़ पौधे लगाये गये. इस कार्य पर 718.88 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई. राज्य सरकार वर्ष 2016 से ही वन महोत्सव को जन आंदोलन के रूप में मना रही है. जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा के सदस्य, राज्य स्तर, जिला स्तर तथा पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों एवं राज्य सरकार के अधिकारी भाग लेते हैं.
41 दिनों के अंदर परमिट निर्गत
राज्य में नाइट्रोजन की कमी और भूमि की कम उर्वरा शक्ति को ध्यान में रखते हुए गहन अध्ययन के बाद यूकिलिप्टस समेत कई ऐसे पौधे लगाये गये जो कम समय में तेजी से बढ़ते है और इसे लगाने में भी कोई विशेष कठिनाई नहीं होती है. इसके अलावा इसका उपयोग फर्नीचर और घर के कामों में भी लिया जाता है. हालांकि अब यह निर्णय लिया गया है कि कम से कम दस प्रतिशत महुआ और अन्य स्थानीय पेड़ लगाने के लिए पौधरोपण का कार्य किया जाएगा. इसके लिए नर्सरी को अंतिम रूप दिया जा रहा है. किसी व्यक्ति के जमीन पर लगाये गये सूखे पेड़ को काटने की जरूरत पड़ती है, तो अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन दिया जा सकता है. इसके लिए 41 दिनों के अंदर परमिट निर्गत कर दिया जाता है.
वन विभाग की जमीन को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा
वन विभाग की अतिक्रमित भूमि को चिन्हित कर उसे अवैध कब्जा से मुक्त कराने का काम किया जा रहा है. बड़ी संख्या में अतिक्रमित जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया है और कुछ मामले भी दर्ज किये गये हैं. झारखंड में पाये जाने वाले 58 प्रतिशत जंगली हाथी अपने गज रिर्जव फॉरेस्ट में ही भ्रमण करते हैं. सिर्फ सात प्रतिशत हाथी ही ऐसे हैं जो आबादी वाले क्षेत्र में घूमते हैं. पलामू के बेतला टाइगर रिजर्व में कम से कम छह बाघ मौजूद है और यह संख्या बढ़ भी सकती है. टाइगर रिजर्व में गर्मी के दिनों में पेयजल संकट को दूर करने के लिए पुराने चेकडैम का जीर्णोद्धार किया जा रहा है. वहीं कुछ नये चेकडैम भी बनाये जा रहे हैं. इसके अलावा जीपीएस पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गयी है और करीब 20 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी की जा रही है. वहीं वन रक्षियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी की गयी है.
झारखंड प्लास्टिक कैरी बैग मुक्त क्षेत्र के रूप में घोषित
झारखंड में प्लास्टिक कैरी बेग के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पूरे राज्य को प्लास्टिक कैरी बैग मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है. इस अधिसूचना के जारी हो जाने के बाद झारखंड में कोई उद्योग, प्लास्टिक कैरी बैग का निर्माण नहीं करेगा. कोई व्यक्ति, दुकानदान, विक्रेता, थोक विक्रेता या फुटकर विक्रेता, व्यापारी, फेरी लगाने वाले या रेहड़ीवाला इसका उपयोग करते पकड़ा जाता है तो उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी.




