
Ranchi: पेट्रोल, डीजल की कीमतों के चलते महंगाई की रफ्तार लगातार तेज थी. इसे देखते केंद्र ने 21 मई को एक बार फिर पहल की. इससे 6 माह पहले भी ऐसे प्रयास हुए थे. शनिवार को उसने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 9.50 रुपये और डीजल पर सात रुपये की कमी की. इसका लाभ रांची में रविवार से दिखने लगा. यहां पेट्रोल 108.71 के बदले 99.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 102.02 के बदले 94.65 रुपये प्रति लीटर मिलने लगा है. केन्द्र की कीमतों में कमी का लाभ जनता को भी मिलने लगेगा.
इधर, राज्य सरकार पेट्रोल, डीजल की दरों में कमी को लेकर अपने अलग ही रंग ढ़ंग में है. वित्त और खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव ने साफ साफ कह दिया है कि राज्य सरकार वैट क्यों घटाये. अब ऐसे में राज्य सरकार के तेवर से साफ लग रहा है कि वह लोगों को रियायत देने के मुड में नहीं है. उसके मुताबिक कार्डधारकों को पेट्रोल पर सब्सिडी देना ही काफी है. झामुमो भी उसके सुर में सुर मिलाये हुए है. उधर भाजपा इसे लेकर हमलावर हो चुकी है.

घोषणा पत्र में था वैट में कमी करने का वादा
झारखंड पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के प्रवक्ता कालिका शाह के मुताबिक वर्तमान सरकार से बड़ी उम्मीदें रही हैं. 2019 में हेमंत सरकार बनते समय रामेश्वर उरांव कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे. पार्टी के घोषणा पत्र के बिंदु 30 में साफ साफ कहा गया कि आम जनता को राहत प्रदान करने को पेट्रोल व डीजल पर वैट की दर कम की जायेगी. पर अब स्थिति यह है कि सरकार में आने के बाद सरकार ने बेरूखी अपना ली है. उस दौरान पार्टी के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह से लेकर मंत्री आलमगीर आलम समेत पार्टी के कई अन्य विधायकों ने भी वैट में कमी की मांग का समर्थन किया था, अब तस्वीर उलट है.
चार दिनों की चांदनी है राहत
शनिवार को जब केंद्र की ओऱ से पेट्रोल, डीजल में कमी के बाद झारखंड में पहल किये जाने का मसला वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के पास आया तो साफ साफ कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई विचार नहीं कर रही है. राज्य सरकार ने जब वैट बढ़ाया ही नहीं है तो उसे घटाने की बात कैसे आ गयी. झारखंड में पहले से ही पेट्रोल सब्सिडी योजना प्रभावी है. दोपहिया वाहन रखने वाले राशन कार्डधारियों को 25 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जा रही है. हालांकि वे भी स्वीकार करते हैं कि इस सब्सिडी प्लान की हालत अभी खस्ता है. पंचायत चुनाव बाद इस पर जरूरी कदम सुधार को उठाये जायेंगे.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर वैट में कमी की बात से मुकर गये हैं. कहा है कि जो छूट केंद्र ने दी है, वह चार दिनों की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली बात है. चार राज्यों में चुनाव खत्म होने पर केंद्र ने 60 दिनों तक पेट्रोल, डीजल की कीमतों में 10 से 15 रुपये का इजाफा किया था. सिलेंडर 390 रुपया महंगा कर दिया था. अब इसमें मामूली छूट देकर अपना गाल बजा रही है.
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक केंद्र ने पहले कीमतें बढ़ायीं और लोगों की कमर तोड़ दी. अब प्लास्टर कराने को छूट दी है ताकि लोग घर बैठ जायें. केंद्र पर राज्य का 1 लाख 36 हजार करोड़ बाकी है. अगर केंद्र इसे राज्य को दे तो राज्य सरकार पेट्रोल की दर 20 रुपये और डीजल 17 रुपये घटा देगी.
भाजपा है हमलावर
भाजपा ने राज्य सरकार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती का दबाव बनाया है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के मुताबिक अभी केंद्र ने जो पहल की है, उससे पहले नवंबर 2021 में दीपावली पर भी केंद्र ने एक्साइस ड्यूटी में कमी की थी, जिससे पेट्रोल पर छह रुपये से ज्यादा और डीजल पर 12 रुपये से ज्यादा की राहत आम लोगों को मिली थी. इसके अतिरिक्त देशभर में भाजपा की राज्य सरकारों ने भी कीमतों में कमी की थी पर झारखंड की हेमंत सरकार ने ऐसा नहीं किया. पूर्व सीएम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश के मुताबिक राज्य सरकार को अपनी हठधर्मिता और बहानेबाजी छोड़कर वैट घटाना चाहिए. केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि सेलेक्टिव तरीके से पेट्रोल पर सब्सिडी देने की राज्य सरकार की योजना भी अव्यवहारिक, जटिल और जनता के लिए अलाभकारी साबित हुई है.
वादाखिलाफी से बचे सरकार
झारखंड पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन बार बार सरकार से गुहार लगा रहा है कि वह वैट में कमी करे. इसके लिये कई बार वित्त मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री और कई अन्य प्लेटफॉर्मों पर भी वे बात रख रहे हैं. एसोसिएशन के प्रमुख अशोक सिंह के मुताबिक मौजूदा समय में राज्य में हर माह करीब सवा लाख किलो लीटर डीजल की खपत होती है. एक किलोलीटर में 1000 लीटर होता है. 22 प्रतिशत वैट के साथ सरकार को इस पर राजस्व के तौर पर 210 करोड़ से अधिक की राशि मिलती है.
पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में सालाना 5-6 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है. ऐसे में अगले 6 सालों में यह वृद्धि लगभग 35 फीसदी हो जायेगी. इस खपत पर 17 प्रतिशत वैट की दर से सरकार को 223 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा. वैट घटने का लाभ यह होगा कि जो इंडस्ट्रियल व्यापारी अभी 30 हजार किलोलीटर डीजल दूसरे राज्यों से मंगा रहे हैं, वह यहीं से लेंगे. राजस्व के तौर पर 40 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. ओवरऑल हर माह 53 करोड़ से अधिक का राजस्व मिल सकता है. इस हिसाब से हर साल 600 करोड़ रुपये तक का राजस्व आयेगा.




