
Ranchi: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे 12वीं हॉकी इंडिया राष्ट्रीय सीनियर महिला हॉकी चैंपियनशिप में आज तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच खेला गया. इसमें हॉकी झारखंड ने अपने चिर प्रतिद्वंदी हॉकी हरियाणा को 3 के मुकाबले 2 गोल से पराजित कर कांस्य पदक प्राप्त किया. झारखंड टीम ने पिछले 7 वर्षों के बाद सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक हासिल किया है. इस टीम को अंतिम समय 2015 के सीनियर नेशनल में रजत मिला था.
आज की मैच जीतने वाली झारखंड टीम की एक रोचक बात यह भी रही कि सीनियर नेशनल में राज्य को पदक दिलाने वाली टीम के सभी 18 खिलाड़ी बेरोजगार हैं. इनमें से 6 खिलाड़ी 2020 के कोरोना काल से ही अपने घरों में रहकर हॉकी की ट्रेनिंग और प्रैक्टिस खुद से कर रहे हैं. टीम की जीत पर हॉकी झारखंड के अध्यक्ष भोलानाथ सिंह ने सभी सदस्यों को बधाई देते कहा कि हमारे खिलाड़ी लगातार मेहनत कर रहे हैं. अच्छा प्रदर्शन इसका गवाह है. उनके अलावे हॉकी झारखंड के शशिकांत प्रसाद, विजय शंकर सिंह रजनीश कुमार, मनोज कोनबेगी, माइकल लाल, अश्रिता लकड़ा, असुंता लकड़ा, प्रतिमा बरवा, तारिणी कुमारी सहित अन्य ने भी शुभकामनाएं दी हैं.
शुरू से दिखाया शानदार खेल
झारखंड टीम ने मैच में लगातार शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए हरियाणा पर अपना आक्रमण बनाये रखा था. दीप्ति टोप्पो ने हाफ टाइम तक झारखंड की टीम को 1-0 से आगे कर दिया था. उसके बाद 40वें मिनट में पुनः एक और पेनाल्टी कॉर्नर को तेजतर्रार फॉरवर्ड अलबेला रानी टोप्पो ने गोल में बदलकर टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी. प्रतियोगिता में अभी तक सर्वाधिक गोल कर चुकी झारखंड की वेतन डुंगडुंग ने 43वें मिनट में एक शानदार फील्ड गोल कर टीम को 3-0 से बढ़त दिलायी. अंतिम क्वार्टर में हरियाणा की टीम ने बहुत ही आक्रामक खेल दिखाया. झारखंड टीम पर कई अटैक किये. हरियाणा टीम की ओर से अमनदीप कौर ने 55वें मिनट में झारखंड के ऊपर एक शानदार फील्ड गोल कर दिया. उसके एक मिनट बाद ही पुनः हरियाणा की भारती सरोहा ने एक गोल दाग दिया. अंततः मैच 3 के मुकाबले 2 गोल पर छूटा.
साई ने दिखाया था बाहर का रास्ता
हॉकी झारखंड के मनोज कोनबेगी के मुताबिक टीम के खिलाड़ी पहले साई कोलकाता में ट्रेनिंग ले रहे थे. पर पिछले वर्ष इन्हें वहां से बाहर निकाल दिया गया. इससे पहले भी वे कोरोना के चलते घर में ही थे पर इन खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत की. 7 वर्षों बाद झारखंड की झोली में कांस्य पदक डालकर अपना रूतबा दिखाया. यदि इन सब खिलाड़ियों के लिए सरकार के किसी प्रशिक्षण केंद्रों में सुविधाएं मिल जाये तो झारखंड टीम निश्चित रूप से स्वर्ण पदक भी प्राप्त करके दिखायेगी. आने वाले दिनों में भी ये प्रतिभावान खिलाड़ी झारखंड के लिए एवं देश के लिए खेल सकते हैं. इनके लिये सालों भर ट्रेनिंग एवं आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था की जरूरत है. सरकार ध्यान दे.




