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कॉल सेंटर में नौकरी देने के नाम पर युवाओं से कराया जा रहा साइबर क्राइम

Ranchi: साइबर अपराधी अपने नापाक मंसूबो को अंजाम देने के लिए अब पढ़े लिखे युवाओ को अपने झांसे में लेकर साइबर अपराध जैसे वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. वहीं इन युवाओं की इसकी भनक तक नहीं होती कि रोजगार के नाम पर इन्हें अपराध की दलदल में धकेला जा रहा है. ऐसा ही एक मामला राजधानी में आया है, हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है.

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बीटेक, बीसीए कर चुके युवाओ को कॉल सेंटर में काम दे उनका इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल साइबर अपराध के लिए करते है. अबतक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार दूर कहीं बैठा साइबर अपराधी कॉल सेंटर के नाम पर कम्प्यूटर के जानकार युवाओ को अपने साथ जोड़ता है. जिन्हें 10 से 15 हज़ार रुपए का भुगतान भी किया जाता है. वहीं साइबर अपराधी पोर्न साइट और डेटिंग एप पर कुछ पॉपअप लोड करते है जिसपर क्लिक करते ही किसी का भी सिस्टम हैक हो जाता है और पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है. हालांकि उसमें एक कस्टमर केयर का नंबर दिया होता है जिसपर कस्टमर को कॉल करने को कहा जाता है और जब कस्टमर उसपर कॉल करता है तो सिस्टम ठीक करने के एवज में पैसे भी लिए जाते है. और इसे कॉल सेंटर मे बैठे युवा ही दुरुस्त करते हैं. मामले की जानकारी देते हुए रांची सिटी एसपी ने बताया कि साइबर फ्रॉड युवाओ को बरगला कर उन्हें साइबर के अपराध की दल दल मे धकेल रहे हैं.

 

कॉल सेंटर में सभी का अलग अलग काम होता है. कोई मालवेयर भेजता है तो कोई फोन पिक करता है तो कोई सिस्टम हैक तो वही कोई सिस्टम को मालवेयर से दुरुस्त करने का काम करता है. ठगे जाने पर भी लोग शर्म के कारण पुलिस के पास नहीं जाते हैं इसकी वजह से पुलिस को वक्टिम नहीं मिल पाते हैं.

 

पिछले दिनों धनबाद में भी इस तरह का मामला सामने आया था. धनबाद के कॉल सेंटर से यूएसए के कई सिस्टम पर मालवेयर भेज सिस्टम को हैक किया जा रहा था. वही राँची में भी इस तरह के एक कॉल सेंटर की बात सामने आई यहां भी इसी तरह से ये सिस्टम संचालित हो रहा था.इस तरह के मामलों मे सबसे बड़ी अड़चन पीड़ित का सामने आना होता है जिसके कारण पुलिस की इन्वेस्टिगेशन प्रभावित होती है इसके साथ ही कॉल सेंटर में काम कर रहे युवाओं को भी कॉल सेंटर के संचालक की जानकारी नहीं होती. मामले की जानकारी देते हुए साइबर डीएसपी सुमित कुमार ने बताया कि हाल के दिनों में जिन युवाओं को डिटेन किया गया था ज्यादातर कोलकाता, बिहार और साउथ इंडिया के युवा थे जो पढ़े लिखे होने के साथ उन्हें कम्प्यूटर का भी पूरा ज्ञान था. वीपीएन के इस्तेमाल के जरिए आईपी एड्रेस को दिखाया जाता है विदेशों में.

 

कोरोना संक्रमण की वजह से युवाओं की नौकरी पर बड़ा असर पड़ा है जिसका फायदा उठाते हुए साइबर अपराधी बेरोजगारो को साइबर अपराध के दल दल मे धकेल रहे है. वहीं पुलिस युवा वर्ग से अपील करते हुए कहती है वे जहां भी काम करे पहले उस संस्थान किअच्छे से तहक़ीक़ात कर ले ताकि भविष्य में किसी पचड़े में पड़ने से बच जाएं.

 

 

 

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