
Giridih: करीब 55 लाख की लागत से गिरिडीह के 35 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं. लेकिन इनमें पांच कैमरे खराब पड़े हैं. इस कारण इन कैमरों का फायदा पुलिस विभाग बहुत अधिक ले नहीं पा रहा है.
वैसे उप नगरी पचंबा की सुरक्षा को लेकर भी कैमरे लगाये गये हैं. लेकिन पूरे पचंबा में कितने कैमरे काम कर रहे हैं और कितने खराब पड़े हैं, इसकी जानकारी फिलहाल किसी के पास नहीं है. पचंबा में लगाए गये कैमरे से पचंबा थाना पर नजर रखी जाती है तो शहरी क्षेत्र में लगे कैमरे से गिरिडीह हाई स्कूल के समीप जिला नियंत्रण कक्ष पर नजर रखी जाती है.
स्थिति यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए इन कैमरों के मैटेनेंस के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा अब तक कोई अतिरिक्त फंड की व्यवस्था नहीं की गयी. इसकी बानगी है कि पांच कैमरे तीन माह तीन दिन से खराब पड़े हैं.
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इधर इन कैमरों के रखरखाव करने वाली एजेंसी ऑरेंज मीडिया के प्रभारी मानस कुमार का दावा है कि पचंबा में सभी कैमरे फंक्शन कर रहे हैं, जबकि शहर के पांच कैमरे खराब पड़े हैं. इसकी जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन खराब कैमरों को जल्द ठीक करा लिया जायेगा.

प्रभारी का यह भी कहना था कि अतिरिक्त फंड नहीं रहने के कारण अक्सर मैटेनेंस में परेशानी होती है. फिलहाल जो व्यवस्था है, उनके अनुसार प्रचार-प्रसार के लिए शहर में सड़क किनारे जो पोल लगे है, उस पोल में लगने वाले होर्डिंग्स की कमाई ही इन कैमरों के मैटेनेंस का साधन है. जबकि दूसरे शहरों में ऐसे हालात नहीं हैं. अतिरिक्त फंड की व्यवस्था पहले से की गयी है.
पुलिस सूत्रों की मानें तो शहर में जो कैमरे तीन माह और तीन दिनों से खराब पड़े हैं, उसमें दो बस पड़ाव में तो एक नगर थाना के सामने, एक नेताजी चौक के साथ, एक सांई आश्रम के समीप लगा है. खराब कैमरों को लेकर कंपनी के प्रभारी ने कहा कि अब जानकारी मिली है तो अगले दो दिन के भीतर दुरुस्त कर दिया जाएगा.
लेकिन मामला सिर्फ खराब कैमरे तक सीमित नहीं है. बल्कि, विडंबना इस बात को लेकर भी है कि अगर 35 कैमरे लगे हैं तो इन कैमरों को 24 घंटे फंक्शनल रखने के लिए पावरबैक भी जरूरी है, जबकि शहर के जिन-जिन हिस्सों में कैमरे हैं, वहां बिजली के बाद पावरकट होने पर कैमरे भी बंद हो जाते हैं.
लिहाजा, समझा जा सकता है कि शहर की सुरक्षा नगर थाना पुलिस के लिए कितनी बड़ी चुनौती भरा है. इधर कंपनी के प्रभारी मानस कुमार ने कहा कि कैमरे के खराब होना अलग विषय है.
इसे अधिक परेशानी इनके तारों के टूटने का है. एक कैमरे का तार टूटने पर काफी पैसे खर्च हो जाते हैं. अब इन परेशानियों के बीच ही इन कैमरे को चलाया जा रहा है.
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